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Sunday, 29 March, 2026
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मत-विमत

अंबानी की जगह अगर रघुराम राजन की यूनिवर्सिटी चुनी जाती, क्या इतना हो-हल्ला करते हमारे लिबरल्स ?

आश्चर्य नहीं होगा यदि जियो इंस्टीट्यूट की आलोचना करने वाले लोग ही इसके नए चांसलर पद के लिए सीवी तैयार कर रहे हों

पाकिस्तान के जनरलों की बेवकूफी की बदौलत, लोकतंत्र के हितैषी की छवि में उठ रहे हैं नवाज़ शरीफ

शरीफ का कारावास उनके राजनीतिक करियर को खत्म नहीं करेगा और यह उनके पतन की योजना बनाने वाले जनरलों और कर्नलों के रिटायरमेंट के बाद तक कायम रहेगा

ऐसे मज़बूत हुई 377 के खिलाफ कानूनी लड़ाई

धारा 377 के खिलाफ लड़ाई गैर सरकारी संगठनों से स्वयं एलजीबीटी के लोगों तक, सेक्स से अधिकारों तक गोपनीयता से समानता तक पहुँच चुकी है

अकड़ और अज्ञानता: इन दो क्षेत्रों में आईएएस अफसरों ने दिखाई है तेज़ी से वृद्धि

अधिकांश आईएएस अधिकारी को अपने योगदान पर भरोसा नहीं होता, कुछ आईएएस अफसरों को झुकने को भी कहेंगे वे लेटने को तैयार हो जाएंगे

कैसे पाकिस्तान की एक ‘लाड़ली शहज़ादी’, शेरनी बनकर अपने देश के लिए दहाड़ रही है

मरियम नवाज फूहड़ राजकुमारी से अब उर्दू शब्दकोष में सुधार और चुस्त कपड़ों के साथ बन गई हैं एक राजनेता। वह अब इसका नेतृत्व कर रही हैं

सब कुछ होने के बावजूद भारतीय सेना के बिगड़े हालातों को सुधारने का सुनहरा अवसर गँवा बैठे मोदी

मोदी सरकार के पास भारतीय सेना के सुधार एवं आधुनिकीकरण का अभूतपूर्व मौका था । किंतु सरकार ने यह मौका गंवा दिया और अब ठोकपीट से काम चला रही है

क्या अब समय आ गया है कि ट्रम्प की सुनें और डब्लूटीओ को सुधारा जाए?

डब्ल्यूटीओ की सीमाएं हैं लेकिन यह अपने आप कार्य नहीं कर सकता, इसे सदस्य राष्ट्रों की पहल की प्रतीक्षा करनी होती है. सवाल यह भी उठता है की WTO क्या कर रहा है

कांग्रेस में नहीं दिखती मुसलमानों के हित में फैसले लेने की काबिलियत

राहुल गांधी का मुस्लिम बुद्धिजीवी वर्ग को बुलाने का स्वागत है लेकिन चुनावी रणनीति के संदर्भ में उनकी इस पहल की स्पष्टता और 2019 के अजेंडे के बोध में कमी थी

‘नाम बड़े, दर्शन छोटे’: 70 के दशक की सुप्रसिद्ध अभिनेत्री के इमरान खान संग अनुभव

रेहम खान अपनी पुस्तक में 70 के दशक में एक बॉलीवुड सुपरस्टार के साथ अपने पूर्व पति इमरान खान के कथित सम्बन्धों का वर्णन करती हैं

लाहौर और खान मार्केट के लिबरल्स की राय से मीलों परे है भारत-पाकिस्तान की राजनीति

पाकिस्तानी सेना/आईएसआई ने न्यायपालिका और इमरान को सह-अपराधी बनाकर अपनी प्रमुखता को समग्र करने के लिए एक राजनीतिक ‘दूसरा’ का आविष्कार किया है

मत-विमत

खाड़ी युद्ध ने भारत की कमजोरियां उजागर कीं, अब राष्ट्रीय हित में आत्ममंथन का वक्त है

सरकार कड़वा सच क्यों नहीं बोल सकती, इसे समझना बहुत आसान है. तमाम युद्धों की तरह यह युद्ध भी जब रुक जाएगा तब भी भारत के हित विजेता के साथ भी जुड़े होंगे और हारने वालों के साथ भी.

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दिल्ली का अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान कर रहा:मंत्री कपिल मिश्रा

नयी दिल्ली, 28 मार्च (भाषा) दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने शनिवार को कहा कि दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफडी) प्रतिभाओं के लिए...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.