डब्ल्यूटीओ की सीमाएं हैं लेकिन यह अपने आप कार्य नहीं कर सकता, इसे सदस्य राष्ट्रों की पहल की प्रतीक्षा करनी होती है. सवाल यह भी उठता है की WTO क्या कर रहा है
राहुल गांधी का मुस्लिम बुद्धिजीवी वर्ग को बुलाने का स्वागत है लेकिन चुनावी रणनीति के संदर्भ में उनकी इस पहल की स्पष्टता और 2019 के अजेंडे के बोध में कमी थी
सरकार कड़वा सच क्यों नहीं बोल सकती, इसे समझना बहुत आसान है. तमाम युद्धों की तरह यह युद्ध भी जब रुक जाएगा तब भी भारत के हित विजेता के साथ भी जुड़े होंगे और हारने वालों के साथ भी.