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Sunday, 8 March, 2026
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मत-विमत

पत्रकारों को गाली देने से नहीं बदलेगा 1993 की घिनौनी साजिशों का इतिहास

यह कितना पैशाचिक है, यहाँ पढ़ें। सिलसिलेवार धमाकों के बाद शूरू होने वाले दंगों के लिए 71 एके, 500 ग्रेनेड और 3.5 टन आरडीएक्स को सुरक्षित स्थानों पर छिपाया गया था। अकेले बॉम्बे ने ही भारत को बचा लिया और आईएसआई को नाकाम कर दिया

सोनाली बेंद्रे की कैंसर घोषणा ने अनचाही अफवाहों को किया परे

बेंद्रे द्वारा अपनी बीमारी के बारे में किया गया ट्वीट मीडिया की अटकलों से पहले एक सेलिब्रिटी द्वारा ईमानदारी से खुलासे का एक और उदाहरण है।

हर मॉनसून डूबती है मुंबई: क्यों बीमारी और थकावट से ग्रस्त है यह शहर

जैसे ही एक और पुल गिरता है और मुंबईवासी दोषारोपण हैं। खुद को दोबारा याद दिलाने के लिए इन इबारतों को साझा करते हैं...

सुबह का भूला यदि शाम को घर न लौटे, तो उसे नीतीश कुमार कहते हैं

नीतीश कुमार ने हमेशा दूसरों की बैसाखी पर विशुद्ध सहुलियत भरी राजनीति की है। अब उनका सामना मोदी-शाह की तानाशाही वाली भाजपा से हुआ, तो इनके होश उड़े हुए हैं

फेक न्यूज़ से लोग मर रहे हैं और व्हाट्सएप बस खड़े खड़े तमाशा देख रहा है

20 करोड़ भारतीयों द्वारा उपयोग की जाने वाली मैसेंजर सेवा को अपने पक्ष को सिद्ध करना है

मोदी को यदि हराना है, तो नितीश को गले लगाना है

2019 लोकसभा चुनावों में भाजपा को हराने के लिए विपक्ष के लिए बिहार एक महत्वपूर्ण राज्य है।

सुषमा स्वराज तो ट्रोल हुई हीं, पर आईआईटी की छवि को भी पंहुचा है नुकसान

यह जरूर कहा जाना चाहिए कि आईआईटी वैल्यू सिस्टम का इस प्रकार के व्यवहार के साथ कोई लेना-देना नहीं है, चाहे यह किसी भी माध्यम पर हो

हर कोई यात्रा करता है, तो राहुल गाँधी की छुट्टियों पर इतनी उत्तेजना क्यों?

राहुल गांधी कांग्रेस का चेहरा हैं। उनके शब्दों और कार्यों से यह प्रभाव पड़ता है कि लोग पार्टी के बारे में क्या सोचते हैं।

सिर्फ एक व्हाट्सएप्प अफवाह से हुई 29 लोगों की मौत, पर किसको है परवाह?

अगर प्रधानमंत्री इन व्हाट्सएप अफवाहों का शिकार न होने का अनुरोध करते हैं तो इससे कुछ फर्क पड़ सकता है। लेकिन कोई भी उनसे ऐसा करने के लिए नहीं कह रहा है। नरेंद्र मोदी के समक्ष यह पूछने में कई हफ्ते लग जाते हैं कि किसी मुद्दे पर प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं।

दत्त नहीं तो मुन्ना भाई सही, कैसे ‘संजू’ के किरदार को निभाते हैं रणबीर कपूर

फिल्म में मीडिया को बहुत बुरे रूप में दर्शाया गया है क्योंकि समाचार पत्रों ने दत्त के जीवन को बर्बाद कर दिया है। समाचार सुर्ख़ियों के सवालिया निशान उन्हें असहाय छोड़ते हुए उन्हें दोषी ठहराते हैं

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ईरान का संघर्ष भारत तक पहुंचा, मुसलमानों से फिर देशभक्ति साबित करने की मांग

जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.

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दिल्ली के नांगलोई में अचार के कुएं में गिरने से फैक्टरी मालिक और उसके बेटे की मौत

नयी दिल्ली, सात मार्च (भाषा) दिल्ली के नांगलोई इलाके में शनिवार शाम को अचार बनाने की एक फैक्टरी में कुएं में गिरने से फैक्टरी...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.