मोदी ने लाल किले से धार्मिक झगड़ों को दरकिनार कर विकास के पथ पर बढ़ने का आह्वान किया था, लेकिन आज विकास की राजनीति मंदिर और मूर्ति के पीछे छुपती दिख रही है.
मोदी-भाजपा गलियों और सड़कों से संकेत ग्रहण करते हैं और उसी मिजाज के संदेश देते हैं. इसने कांग्रेस को उलझन में डाल दिया है और भाजपा विरोधी कुलीन तबके को अलग-थलग कर दिया है.
देश की आधी से ज़्यादा आबादी ओबीसी जातियों की है. नरेंद्र मोदी कहते हैं कि वे ओबीसी हैं. ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि मौजूदा सरकार ने ओबीसी के लिए अब तक क्या किया.
यह समझने के लिए कि 1971 को भारत की संसदीय सीटों का आधार क्यों बनाया गया, 1960 के दशक के उस माल्थसवादी डर को फिर से देखना होगा, जो विकास से जुड़ी सोच पर हावी था.
जयपुर, 22 जनवरी (भाषा) राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक जैसे मामलों को लेकर कांग्रेस नेताओं...