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Wednesday, 21 January, 2026
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जहां जनरल कैंडिडेट 90 फीसदी तक हैं, वहां कैसे लागू हो सवर्ण आरक्षण?

आरटीआई से मिले आंकड़ें और सरकार द्वारा संसद में दी गई जानकारी से पता चलता है कि कई जगहों पर जनरल कटेगरी के लोग 90 फीसदी या उससे भी ज्यादा हैं. ऐसे में सवर्ण आरक्षण की क्या जरूरत पड़ गई?

क्यों सपा-बसपा गठबंधन भाजपा के अंकगणित को हरा सकता है ?

बुआ और भतीजे को भी लगने लगा है कि 2019 में दिल्ली दरबार का रास्ता लखनऊ से होकर जायेगा.

हाशिये पर पहुंचा घुमंतू: इनकी घुम्मकड़ी में ही छुपी हैं हमारी लोक परंपराएं

घुमंतू समाज अपनी रंग बिरंगी जीवनशैली से हमेशा से देश दुनिया के लोगों को आकर्षित करता रहा है, लेकिन हम आपको बता रहे हैं कि इस रंगीन दुनिया के पीछे कैसी है बदरंग दुनिया.

लोहिया और आंबेडकर का अधूरा एजेंडा क्या माया-अखिलेश करेंगे पूरा?

लोहिया और आंबेडकर 1956 में साथ मिलकर चलने की संभावना तलाश रहे थे, जो संभव नहीं हो पाया. उसके 37 साल बाद जाकर सपा और बसपा दो साल के लिए साथ आए और फिर आया 25 साल का अंतराल. अब वे फिर साथ आए हैं.

कोई तो समझाये इन्हें कि सिर्फ एक कंबल से नहीं कटती पूस की रातें!

दरअसल, प्रेमचंद ने यह कहानी लिखी तो न इक्कीसवीं सदी आयी थी और न ही किसी प्रधानमंत्री के दिमाग में ‘न्यू इंडिया’ का आइडिया आया था.

अमेरिका में ओबामा राष्ट्रपति, तो भारत में मायावती प्रधानमंत्री क्यों नहीं

भारत में अब तक कोई दलित-आदिवासी पीएम नहीं बना. जगजीवन राम इस कुर्सी के बेहद करीब पहुंच कर रह गए. अमेरिका के श्वेतों ने ओबामा को राष्ट्रपति बनाया, क्या भारत के सवर्ण ऐसा कर पाएंगे?

सपा-बसपा गठबंधन के बाद कितनी सुरक्षित है योगी की कुर्सी

उत्तरप्रदेश में सपा और बसपा के बीच गठबंधन होने से भाजपा पर मंडरा रहा खतरा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर भी मुड़ सकता है.

सीबीआई ही नहीं, मोदी सरकार ने किसी भी संस्थान को स्वायत्त नहीं छोड़ा

खुफिया ब्यूरो और राष्ट्रीय जांच एजेंसी की विश्वनीयता तो लंबे समय से सवालों के घेरे में है.

सपा-बसपा-राजद की दोस्ती से बदला उत्तर भारत का राजनीतिक भूगोल

उत्तर प्रदेश और बिहार में लोकसभा की 120 सीटें हैं. नरेंद्र मोदी की सरकार मुख्य रूप से इसी गंगा-यमुना के मैदान में बनी थी. अब यहां का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुका है.

आरक्षण के बारे में वे 25 जातिवादी-अश्लील जोक्स, जो अब कोई नहीं कहेगा

एससी-एसटी-ओबीसी आरक्षण को लेकर अब तक बेहद अश्लील और जातिवादी जोक्स बनाए जाते रहे हैं. लेकिन सवर्ण आरक्षण के बाद क्या अब ऐसे जोक्स बन पाएंगे?

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मौनी अमावस्या और पीएम मोदी—भारत की सोची-समझी चुप्पी के क्या मायने हैं

वैश्विक शोर-शराबे के माहौल में भारत का प्रतीकात्मक ‘मौनव्रत’ कूटनीति का सबसे प्रभावी साधन है. यह नई दिल्ली की रणनीतिक अस्पष्टता को बनाए रखता है.

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तोपों की गड़गड़ाहट, ड्रोनों की ताकत : रेजिमेंट ने मारक क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया

नासिक, 21 जनवरी (भाषा) सेना की तोपखाना रेजिमेंट ने अपने वार्षिक अभ्यास ‘एक्सरसाइज तोपची' के दौरान बुधवार को भारतीय सेना की गोलाबारी क्षमता का...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.