यूपी में कांग्रेस के दलित मतदाता बसपा में शिफ्ट हो गए, मुसलमानों की पहली प्राथमिकता सपा और दूसरी बसपा हो गई. बचे सवर्ण, तो वो अब पूरी तरह से भाजपा में हैं.
कांग्रेस के सपा-बसपा गठबंधन में शामिल होने से सबसे बड़ा नुकसान ये है कि जो मतदाता सपा-बसपा छोड़कर इसकी ओर आना चाहता है, वह फिर से इन्हीं दलों में उलझकर रह जाएंगे. कांग्रेस के स्वतंत्र विकास में इससे अड़चन आएगी.
कांग्रेस की समस्या यह है कि सवर्ण और उसमें भी मुख्य रूप से ब्राह्मण उसे वोट नहीं देते लेकिन पार्टी वही चला रहे हैं. इसलिए पार्टी अब ओबीसी के पास जा रही है, पर क्या ओबीसी उसके पास आएंगे?
आदर्श आचार संहिता लागू होने के पहले मध्य प्रदेश में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के अध्यादेश को राज्यपाल से मंजूरी दिलाकर कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह फ्रंटफुट पर खेलने को तैयार है.
हाल के कांग्रेस नेता राहुल गांधी के तीर उतने निशाने पर नहीं लगे जैसे ‘सूट-बूट वाली सरकार’ का तंज़ निशाने पर लगा था, उन्हें बेरोज़गारी का मुद्दा उठाना चाहिए.
एक चीज़ जो ट्रांस की खूबसूरती को ज़िंदा रखती है, वह है उनका समुदाय और अपनापन. लेकिन कानून बनाने वालों की नजर में, यह अपनापन ‘धोखा’, ‘लुभाना’ और ‘गलत असर डालना’ बन जाता है.
लेह, 30 मार्च (भाषा) प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अर्द्धन्यायिक कार्यबल को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए सैन्य इकाइयों...