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Thursday, 8 January, 2026
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क्या आप उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति के ‘के-फैक्टर’ के बारे में जानते हैं?

उत्तर प्रदेश की एक प्रमुख पिछड़ी जाति कुर्मी अगले लोकसभा चुनाव में किस ओर रुख करेगी? उन्हें लुभाने की कोशिश तमाम दल कर रहे हैं.

क्या यूबीआई भाजपा सरकार के लिए तुरुप का पत्ता साबित होगा?

यूबीआई लागू करना कम आबादी वाले और अमीर देशों के लिए तो आसान है मगर भारत जैसे विशाल आबादी वाले विकासशील और सीमित संसाधनों वाले देशों के लिए टेढ़ी खीर है.

उत्तर-पूर्व के ईसाई बहुल नागालैंड में कैसे बनी भाजपा पसंद की पार्टी

पूर्वोत्तर भारत में भाजपा का स्वीप संभव है और इसके पीछे केवल मोदी ही अकेले कारण नहीं, विकास और योजनाओं का क्रियान्वयन है.

जेल में बंद लालू यादव क्या 2019 में होंगे सत्ता के किंगमेकर?

अंग्रेज़ी पत्रिका आउटलुक ने अपने ताज़ा अंक में लालू प्रसाद यादव को 2019 का एक ऐसा किंगमेकर बताते हुए कवर स्टोरी की है, जो शायद रंगमंच पर नज़र नहीं आएगा.

2019 के चुनावी गणित में, बसपा+सपा का मतलब होगा भाजपा का फायदा

हम उत्तर प्रदेश में 2014 की तरह अभूतपूर्व वोटर स्विंग की उम्मीद कर सकते हैं. सपा-बसपा गठबंधन से भाजपा सभी 80 सीटों पर बहुकोणीय मुक़ाबले से बच सकती है.

बिहार महागठबंधन में 20 सीटें? आखिर कांग्रेस चाहती क्या है

बिहार में महागठबंधन का नेतृत्व आरजेडी के हाथ में है. वहां कांग्रेस अपनी हैसियत से ज़्यादा सीटें मांगकर उसके लिए मुसीबत खड़ी कर रही है.

रोहित वेमुला कांड: दलितों के राष्ट्रीय प्रतिरोध की पहली घटना

रोहित वेमुला की जाति को लेकर चाहे जो कहा जाए, देश के दलितों ने उसे अपना मान लिया और उसकी मृत्यु के विरोध में जैसा आंदोलन किया, वो प्रतिरोध की मिसाल है.

इस बार बीजेपी के ‘जय श्रीराम’ हवा में आसानी से नहीं उड़ेंगे!

अति पिछड़ों व पसमान्दा मुसलमानों को साथ लाये बिना किंगमेकर नहीं बन सकती सपा-बसपा. दोनों को अपनी राजनीति नए सिरे से तलाशनी होगी.

बिना सोचे-समझे भाजपा ने मोहम्मद अली जिन्ना के सुपुर्द किया भारत

हिंदुत्व आंदोलन 1947 में मुस्लिम साम्प्रदायिकता की हूबहू परछाई है. इसमें उस कट्टरता की गूंज है, जिसको भारत ने तभी नकार दिया था.

जहां जनरल कैंडिडेट 90 फीसदी तक हैं, वहां कैसे लागू हो सवर्ण आरक्षण?

आरटीआई से मिले आंकड़ें और सरकार द्वारा संसद में दी गई जानकारी से पता चलता है कि कई जगहों पर जनरल कटेगरी के लोग 90 फीसदी या उससे भी ज्यादा हैं. ऐसे में सवर्ण आरक्षण की क्या जरूरत पड़ गई?

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शेख हसीना की तानाशाही को शह देने का खामियाजा भुगत रही है जातीय पार्टी

आलोचकों का कहना है कि जातीय पार्टी ने बांग्लादेश की उन चुनावी प्रक्रियाओं और सरकारी सत्ता को वैधता देने में मदद की, जिनकी विश्वसनीयता नहीं थी.

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भाजपा की विधानसभा चुनाव तैयारियों की समीक्षा के लिए नड्डा दो दिवसीय दौरे पर प. बंगाल पहुंचे

कोलकाता, आठ जनवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा बृहस्पतिवार को दो दिवसीय दौरे पर पश्चिम बंगाल पहुंचे, जहां...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.