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Thursday, 16 April, 2026
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आदिवासियों के लिए लोकसभा चुनाव में क्या हैं अहम मुद्दे

यह समझने की जरूरत है कि आदिवासी इलाकों की राजनीति के मुद्दे देश के अन्य इलाकों से भिन्न होते हैं. आदिवासी राजनीतिक से ज्यादा, अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं.

राहुल की कांग्रेस का एक दिशाहीन एनजीओ में तब्दील होने का ख़तरा है

कांग्रेस के पास सवाल तो हैं, मगर सवालों के जवाब नहीं हैं, 'नेता' हैं मगर विजेता नहीं हैं. चुनाव के चंद सप्ताह पहले वह एक सदाचारी, व्यवस्था विरोधी एनजीओ की तरह पेश आ रही है, जो बस अपना फर्ज़ निभाने से मतलब रखता है.

वादों की तहकीकात: आखिर रोजगार देने में कितनी सफल रही मोदी सरकार

सरकार रोजगार के 2014 के चुनावी वादे पर विफल हुई है. आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि बेरोजगारी बढ़ी है व पिछले 5 साल में ऑर्गनाइज्ड सेक्टर में रोजगार घटा है.

मंडल बांध, यानी चुनावी वर्ष में फिर एक बड़ी परियोजना

मंडल बांध परियोजना से 19 गांव के हजारों लोग विस्थापित होंगे. साढ़े तीन लाख पड़े कटेंगे. पर्यावरण को नुकसान होगा. ऐसी तमाम योजनाएं आदिवासियों के लिए विनाशकारी साबित हुई हैं.

भूमिगत जल के दोहन को लेकर किसी तरह का कोई नियंत्रण नहीं है

वर्चुअल वॉटर ने वैश्विक व्यापार को जो मज़बूती दी है, उसमें करीब 22 फीसद वैश्विक पानी निर्यात के लिए बनाए जाने वाले सामान के लिए उपयोग हो रहा है.

महाराष्ट्र में क्यों हाशिए पर हैं दलित पार्टियां

2019 लोकसभा चुनाव के लिए महाराष्ट्र में दो गठबंधन बने हैं मगर किसी ने भी किसी दलित पार्टी के साथ गठबंधन नहीं किया.

किसी युवा से ऊर्जावान हैं फ़ारूक़ अब्दुल्ला

दूसरे नेताओं में 80 वर्षीय मुलायम सिंह अपनी ही पार्टी में अलग-थलग हैं, वहीं 79 वर्षीय शरद पवार परिवार की अगली पीढ़ी के लिए चुनाव न लड़ने का ऐलान कर चुके हैं.

क्या सचमुच तीन यादवों ने ही महिला आरक्षण बिल को रोक रखा था?

पहली बार महिला आरक्षण बिल आने के दो दशक से ज्यादा गुजरने के बावजूद आज भी इसे बाधित करने का आरोप सिर्फ तीन नेताओं- लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव और शरद यादव पर लगता है.

ऐतिहासिक दस्तावेज़ बताते हैं कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद के लिए एक मंदिर तोड़ा गया

अयोध्या विवाद मंदिर नष्ट किए जाने और उसके अवशेष के सहारे मस्जिद तामीर किए जाने के समय से ही जारी है.

लोकसभा चुनाव में किस पर भरोसा करें आदिवासी?

जिन तबकों का सामाजिक संगठन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर है, उनकी तवज्जो चुनावी राजनीति में कम ही है. उनके हित भी सुरक्षित नहीं.

मत-विमत

पंजाब का धार्मिक बेअदबी विरोधी कानून न्याय की गारंटी नहीं देता, इसके लिए और क्या किया जाना चाहिए?

AAP सरकार ने बेअदबी के मामलों में जवाबदेही के मुद्दे से अपने किसी भी पूर्ववर्ती की तुलना में कहीं अधिक राजनीतिक लाभ उठाया है. अब उसके पास यह अवसर भी है—और दायित्व भी—कि वह अपनी इस बयानबाज़ी को अदालत में अपने प्रदर्शन से साबित करे.

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उप्र: भिखारी की हत्या कर शव को जलाकर मौत का झूठा नाटक करने वाला बर्खास्त पुलिसकर्मी गिरफ्तार

हाथरस, 16 अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश पुलिस के एक बर्खास्त सिपाही को हाथरस जिले में एक भिखारी की हत्या कर शव को जलाकर अपनी...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.