जब उन्होंने देश के सुरक्षित होने की बात कही तो कई लोगों को समझ में नहीं आया कि जिस देश की बात कर रहे हैं, उसमें वह उत्तर प्रदेश भी शामिल है या नहीं, जिसके वे मुख्यमंत्री हैं?
जाति के अध्ययन का मतलब दलितों और पिछड़ों का अध्ययन क्यों है? आखिर कैसे तय होता है कि किन विषयों पर शोध होंगे, और किस सामाजिक समूह को जांच से परे माना जाएगा?
हमारे देश में मीडिया और लोकतंत्र के साथ अभिव्यक्ति की आजादी का भी बुराहाल इसलिए है कि ‘सत्ता प्रतिष्ठान ने अपने मुनाफे के लिए पत्रकारों को प्यादों की तरह चलाना शुरू कर दिया है.
बीएसपी जैसी एथनिक पार्टियों में समस्या होती है कि कोई एक जाति/समूह धीरे-धीरे उस पार्टी की पूरी मशीनरी को अपने क़ब्ज़े में कर लेता है, जिससे अन्य जातियों/समूहों का उससे तेज़ी से मोहभंग हो जाता है.
जोखिम खत्म नहीं हुआ है. इसका रूप बदल गया है—यह नॉन-परफॉर्मिंग लोन की वजह से बैलेंस शीट पर दबाव से हटकर तेजी से बढ़ते डिजिटल सिस्टम को संभालने की ऑपरेशनल चुनौतियों में बदल गया है.