कांग्रेस और जनता दल (सेकुलर) दोनों ही पार्टियों के विधायकों के इस्तीफों और उन्हें लेकर अफवाहों आदि के रूप में जो कुछ घटित हो रहा है, वह न अप्रत्याशित है और न अभूतपूर्व.
यह महज संयोग नहीं है कि भाजपा के दोनों प्रधानमंत्री, अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी असाधारण वाचक रहे हैं. भाजपा सार्वजनिक भाषण पर ज्यादा जोर देती है.
लोकसभा चुनाव में जहां गैर-आदिवासी सीटों पर भाजपा की जीत लाखों वोटों के अंतर से हुई, वहीं आदिवासियों के लिए आरक्षित पांचों सीटों पर जीत का अंतर बहुत छोटा रहा.
आज जो ‘नैतिक न्यूनतम जरूरतों’ की बात उठाई जा रही है, उसके साथ खतरा यह है कि यह हाशिए के समूहों के नेताओं पर ब्राह्मणवादी वर्चस्व स्थापित करने का एक जरिया बन जायेगी.
आयुष्मान खुराना ने एक इंटरव्यू में ये कहा है कि इस रोल की तैयारी करने के क्रम में उन्होंने जूठन किताब को पढ़ा और उन्हें कई रातों तक नींद नहीं आई. कल्पना कीजिए उस व्यक्ति के बारे में जिसने ये जिंदगी जी होगी
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.
नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) दुनिया में जारी कई संघर्षों के बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम (सेवानिवृत्त) ने मानवाधिकारों...