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Monday, 2 February, 2026
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परिसीमन में संख्या पर नहीं, सार्थकता पर ज़ोर जरूरी है इसलिए पेश हैं कुछ विकल्प

जिस जनगणना के आधार पर 2026 के बाद चुनाव क्षेत्रों में हेरफेर किया जाएगा उस जनगणना का कहीं अता-पता नहीं है. इसके बावजूद, परिसीमन की उम्मीद में कई संभावित विकल्पों पर चर्चा जारी है.

बेशक यह युद्ध का युग नहीं, लेकिन पहलगाम हमले का निर्णायक और करारा जवाब देना ज़रूरी

भारत को पूरब और पश्चिम, दो मोर्चों पर उलझने से बचने की कोशिश करनी चाहिए. इससे दुश्मनों को फायदा होगा और विकसित भारत के प्रयासों को झटका लगेगा.

पाकिस्तान के होश तभी ठिकाने लगेंगे जब उसे घेर कर दुनिया में अलग-थलग कर दिया जाएगा

अगर हमें दीर्घकालिक ‘सकारात्मक शांति’ हासिल करनी है यानी समस्या को जड़ से खत्म करना है तो अंतिम राजनीतिक समाधान ढूंढना होगा.

सिंधु जल संधि भारत के लिए नुकसानदेह रही, अब पाकिस्तान को भुगतने का समय

सिंधु जल संधि को एक तकनीकी समझौते के रूप में देखा गया था, लेकिन अब इसे कूटनीति, आतंकवाद विरोधी नीति और भू-राजनीतिक रणनीति के नज़रिए से देखा जा रहा है.

मंत्रियों की ज़िम्मेवारी तय करना PM मोदी का स्टाइल नहीं, लेकिन उन्हें अब ऐसा क्यों करना चाहिए

देखा जाए तो अमित शाह ही जम्मू-कश्मीर को चला रहे हैं, लेकिन उनसे सुरक्षा चूक के लिए जवाबदेही मांगना अनुचित होगा क्योंकि उन्हें देश भर के हर चुनाव में बीजेपी की जीत सुनिश्चित करनी है.

स्मारकों से लेकर बस्तियों तक: यूपी की दलित राजनीति में वापसी की राह तलाशती मायावती

कांग्रेस से लेकर भाजपा तक दलितों को साधने की होड़ में जुटे हैं सभी दल, लेकिन क्या सपा-बसपा अपनी ज़मीनी पकड़ और भरोसे को फिर से बहाल कर पाएंगे या हिंदुत्व को खुला मैदान मिलेगा?

आतंकवाद को बढ़ावा देकर पाकिस्तान मुस्लिम जगत में खुद को ही अलग-थलग कर रहा है    

खाड़ी के कुछ देशों की विदेश नीति आज रणनीति, सुरक्षा, और वैश्विक प्राथमिकताओं के आधार पर तय हो रही है, न कि मजहबी और सैद्धांतिक रुझानों के आधार पर.

जल्दबाजी से काम न लें. पाकिस्तान को दबाव में रखें, फिर सटीक और लगातार हमला करें

पाकिस्तान भले ही आर्थिक मुसीबतों से घिरा है लेकिन जम्मू-कश्मीर में छद्मयुद्ध छेड़ने की उसकी क्षमता घटी नहीं है. पहलगाम में हमला भारत के ‘नया कश्मीर’ के सपने को तोड़ने की मंशा से किया गया.

45 वर्षों से पाकिस्तान की आईएसआई हिंदुओं की हत्या कर रही है, ताकि भारत में गृह युद्ध छेड़ा जा सके

एक समय, आईएसआई का सोच यह था कि यहां के हिंदू अपने यहां के अल्पसंख्यकों से बदला लेने पर उतर आएंगे. वे भारत में इस तरह का संकट पैदा करने की कोशिश करते रहे हैं कि इस देश में गृहयुद्ध छिड़ जाए.

मोदी के सामने कश्मीर में भारत की ‘रेड लाइन’ बहाल करने के पांच विकल्प हैं—लेकिन हर एक खतरनाक है

इस्लामाबाद को पता चल गया है कि वह कश्मीर नहीं जीत सकता. उसकी सेना का उद्देश्य कश्मीर जीतना या पाकिस्तान के लिए रणनीतिक लाभ कमाना नहीं है, बल्कि भारत को कष्ट पहुंचाना है.

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