क्या पाकिस्तान खालिस्तान के मुद्दे को फिर से सुलगाना चाहता है या वह एक भू-राजनीतिक औजार के रूप में करतारपुर गलियारे का उपयोग करना चाहता है? दोनों का ही उत्तर ‘हां’ है.
दोनों नेता बड़बोले दावे करने में माहिर हैं, दोनों जो पैकेज पेश कर रहे हैं उनमें कोई फर्क नहीं है, दोनों की कार्यशैली व्यक्तिपूजा को बढ़ावा देने वाली है. लेकिन दोनों में अहम एक अंतर है. ‘आप’ में वह तीखी सांप्रदायिकता नहीं है जो भाजपा में है.
जेएनयू किसी कन्हैया या शेहला से बढ़कर है. लेकिन कभी विविधता और लोकतंत्र का प्रतीक रहा विश्वविद्यालय टीवी बहसों, जहरीले ट्वीटों और अगंभीर बहसों में बदनाम हो रहा है.
जेएनयू मुक्त विचारधारा के लिए जाना जाता रहा है. जब लेफ्ट के नेता सीताराम येचुरी जेएनयू में पढ़ते थे तब उन्होंने इंदिरा गांधी का कैंपस में विरोध किया था.
पाकिस्तान की आर्थिक नीति तय करने वाले इमरान खान के वित्तीय सलाहकार हफीज शेख का दावा है कि वहां टमाटर 17 रुपये किलो की दर से बिक रहा है, न कि 320 रु. किलो की दर से.
अब जब चीन को बड़े दांव वाले युद्ध पर नज़र रखने में व्यस्त किया जा रहा है, यह छोटा पड़ोसी संघर्ष पाकिस्तान को भू-रणनीतिक युद्ध का ज़रूरी सबक सिखा सकता है.