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Tuesday, 3 February, 2026
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अगर भाजपा नेता राहुल बजाज की तरह बोल सकते तो वे मोदी और अमित शाह को यह बताएंगे

अमित शाह ने स्पष्ट किया कि किसी को डरने की जरूरत नहीं है तब भाजपा नेता मीटिंग में एकालाप के खिलाफ कुछ बोलने की हिम्मत जुटा सकेंगे.

महाराष्ट्र: देखो उनको जो घुसे चोर दरवाजों से…पहचानो उनको जिन्हें गुलामी भाती है!

देश और साथ ही महाराष्ट्र के सत्तापक्ष व विपक्ष के जनप्रतिनिधियों के लिए सबसे बड़ा सबक यह है कि वे इस शर्म को महसूस करें कि उनकी सत्यनिष्ठा इस कदर संदिग्ध हो चली है कि उसकी बोली लगाने वालों से बचाने के लिए उन्हें प्रायः हर ऐसे संकट के वक्त होटलों में ‘कैद’ करना या अपनी शुभचिंतक सरकारों के राज में ले जाना पड़ता है.

मोदी सरकार को भारत की लुढ़कती जीडीपी से उभरे अवसर को नहीं गंवाना चाहिए

जब आर्थिक वृद्धि दर चार तिमाहियों में 7.0 प्रतिशत से गिरकर 4.5 प्रतिशत पर पहुंच जाए, तो यह मानना ही पड़ेगा कि यह और कुछ नहीं बल्कि मंदी ही है.

मोटा अनाज हुआ फैशनेबल, क्या लोग फिर समझ रहे हैं इसका महत्व

मोटे अनाज को अगर बढ़ावा दिया जाए तो पानी का संकट भी कुछ कम होगा. साथ ही आम लोगों की सेहत भी बेहतर बनेगी.

जीडीपी में गिरावट रोकने का कोई झटपट उपाय क्यों नहीं है

नीतियां ज़मीनी वास्तविकताओं की समझ वाले विशेषज्ञों द्वारा, पर्याप्त विचार-विमर्श के बाद बनाई जानी चाहिए. नेताओं को चाहिए कि वे इनकी जिम्मेदारी लें और समय रहते बदलावों के बारे में कारोबारियों को सूचित करें.

एनसीपी, कांग्रेस और भाजपा के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे राज के मायने

महाराष्ट्र की राजनीति ने साबित कर दिया है कि हर पार्टी के तरकश में कई तीर हैं. और, कोई नहीं जानता कि अगला तीर कौन छोड़ेगा.

ज्वाला गुट्टा : तेलंगाना में बलात्कार और हत्या के लिए समाज को दोष दें, सिर्फ पुलिस या सरकार को नहीं

मैंने हैदराबाद में कभी असुरक्षित महसूस नहीं किया. यकीन करना मुश्किल है कि शहर में ऐसा भयानक अपराध हुआ है.

बीजेपी भले ही राज्यों में सिकुड़ रही हो लेकिन विचारधारा फल-फूल रही है

भाजपा की सत्ता अब भले ही केवल कुछ बड़े और महत्वपूर्ण राज्यों तक सीमित हो गई है लेकिन उसकी हिंदुत्ववादी विचारधारा ने अपना वर्चस्व कायम कर लिया है और देशभर में इसका कोई बड़ा विरोध नहीं हो रहा है.

लुटियंस दिल्ली की चहेती सुप्रिया सुले क्या अब महाराष्ट्र की ताई बन गई हैं

महाराष्ट्र में एनसीपी पर अजित पवार की पकड़ जिस तरह टूटी है उससे वहां की ताज़ा सियासी नौटंकी में सुप्रिया सुले ही खामोश विजेता के रूप में उभरी हैं.

जेएनयू मॉडल जैसी सब्सिडाइज्ड शिक्षा से भारतीय नफरत क्यों करते हैं

भारत में शैक्षणिक संस्थानों के कैंपस को लगातार अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है. इसके लिए रोहित वेमुला, पायल तड़वी, फातिमा लतीफ की आत्महत्या और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हुए विरोध-प्रदर्शन को देखा जा सकता है.

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फैसले में देरी एक चिह्नित बीमारी, इसे खत्म किया जाना चाहिए: उच्चतम न्यायालय

नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने समय पर न्याय सुनिश्चित करने की आवश्यकता रेखांकित करते हुए मंगलवार को कहा कि उच्च न्यायालयों...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.