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Tuesday, 3 March, 2026
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मत-विमत

अर्थव्यवस्था से उम्मीद रखने का यह समय नहीं है, बजट में ज्यादा कुछ करने की कोशिश न करें

इस साल केंद्र सरकार ने ‘स्कीमों’ और परियोजनाओं पर दो साल पहले किए गए खर्च से 48 प्रतिशत ज्यादा खर्च करना तय किया है. सवाल यह है कि इसके लिए पैसा उपलब्ध हो तो भी क्या सरकार के तमाम विभाग इतने बड़े पैमाने पर खर्च कर पाएंगे?

ये तो ‘द इकॉनोमिस्ट’ की करतूत है, वरना मोदी के नेतृत्व में भारतीय लोकतंत्र किसी त्रुटिपूर्ण सूचकांक के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत है

‘द इकॉनोमिस्ट’ ने एक सर्वे के आधार पर भारत की स्थिति का आकलन किया है. संभवत: मोदी सरकार एनपीआर के लिए उसकी टीम का उपयोग करना चाहे.

दुनिया का नरेंद्र मोदी को संदेश— ब्रांड इंडिया को बुरी तरह नुकसान पहुंच रहा है

पहचानवादी राजनीति और आर्थिक गिरावट ने मिलकर ब्रांड इंडिया और इसके साथ ही ब्रांड मोदी की छवि तो कमजोर की है मगर अभी वह हालत नहीं बनी है कि दुनिया हमें खारिज कर दे.

दिल्लीवालों अगर आप यमुना की चिंता करते हैं तो बहुरूपिए कालिया को वोट मत दीजिए

सरकार बनने के बाद यमुना सफाई को लेकर सशक्त एक्शन प्लान तैयार हुआ लेकिन इसे आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने एक बैठक भी नहीं की नतीजा सारा बजट लैप्स हो गया.

पाकिस्तान का इस्लामी संगठन अब दाढ़ी वाले किरदार की फिल्म के पीछे पड़ा और इमरान ख़ान ने घुटने टेक दिए

‘ज़िंदगी तमाशा’ के निर्माता सरमद खूसट को फिल्म की रिलीज टालने की सलाह देकर इमरान ख़ान सरकार ने एक तरह से तहरीके लब्बैक पाकिस्तान के आगे घुटने टेक दिए हैं.

बजट 2020 में एमएसएमई को कर्ज देने को बैंकों की बुनियादी जिम्मेदारियों में शामिल किया जाना चाहिए

केंद्रीय बजट 2020 में एमएसएमई उद्यमों को ऋण उपलब्ध कराने को लेकर एक सुसंगत और व्यावहारिक नीतिगत ढांचा तैयार करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए.

सीएए पर सुप्रीम कोर्ट के सामान्य नज़रिये से लगता है, भारतीयों को वापस सड़क पर उतरने की जरूरत है

भारतीय गणतंत्र को बचाने की लड़ाई अब अदालत और संसद के किले या फिर ऐसी ही किसी प्रतिष्ठानी जगह से नहीं लड़ी जा सकेगी. लोकतांत्रिक और अहिंसात्मक तरीका अपनाते हुए लड़ाई को अब सड़कों तक खींच लाना होगा.

नागरिकता आंदोलन का नेता कन्हैया नहीं, चंद्रशेखर को होना चाहिए

कन्हैया कुमार की आवाज उन लोगों के बीच ही गूंज रही है, जो पहले से मोदी और बीजेपी के विरोधी हैं, जबकि चंद्रशेखर आजाद नागरिकता कानून को दलित-आदिवासी विरोधी बताकर बीजेपी के हिंदू-मुसलमान खेल को तोड़ते हैं.

दिल्ली गैंगरेप और हत्या मामले में दोषियों को फांसी में ‘देरी’ पर सवाल उठाना क्यों गलत है

तत्काल फांसी दिए जाने की की मांग करने वाले भूल जाते हैं कि न सिर्फ मृत्युदंड पाया कैदी, बल्कि उसकी तरफ से कोई भी दया की अर्जी लगा सकता है.

मोदी-शाह सरकार मानव संसाधन के गंभीर संकट का सामना कर रही है, प्रतिभाओं का अभाव दिख रहा है

प्रधानमंत्री मोदी की अत्यंत महान नेता की और शाह की एक अभूतपूर्व रणनीतिकार की छवि निर्मित की गई है. पर वे प्रतिभाओं को आगे लाने में बुरी तरह नाकाम रहे हैं.

मत-विमत

आने वाले नेपाल चुनावों पर चीन की लंबी छाया—रेड लाइन्स और क्षेत्रीय टकराव

नेपाल में Gen-Z मूवमेंट के बाद से चीन थोड़ा शांत रहा है क्योंकि बीजिंग की अपनी रेड लाइन्स हैं, खासकर 1989 के तियानआनमेन स्क्वायर प्रोटेस्ट्स के बाद, जो लोकतंत्र के समर्थन में एक बड़ा आंदोलन था.

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राजनीति

देश

क्या प्रधानमंत्री मोदी किसी राष्ट्राध्यक्ष की हत्या का समर्थन करते हैं: राहुल गांधी

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘हमें अंतरराष्ट्रीय कानून और मानव जीवन की रक्षा में स्पष्ट रूप से बोलने का साहस होना चाहिए. हमारी विदेश नीति संप्रभुता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित है और इसे सुसंगत रहना चाहिए.’

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.