असली सवाल यह है कि सरकार उन आर्थिक सुधारों को लागू करने पर कितनी राजनीतिक पूंजी लगाना चाहती है, जो सुधार किसी-न-किसी तबके के बीच आलोकप्रिय हो सकते हैं?
स्वामी विवेकानंद ने हिंदुत्व, इस्लाम और धार्मिक शरणार्थियों को लेकर जिस साफगोई से अपनी बातें दुनिया के सामने रखी हैं, उन्हें इस मौजूदा परिस्थितियों में एक बार फिर से पढ़ने और समझने की जरूरत दिखती है.
ईरान और अमेरिका दोनों से ही सौहार्दपूर्ण संबंध रखने वाले भारत को अनियंत्रित वैश्विक घटनाक्रमों के मद्देनज़र मुश्किलों में घिरी अपनी अर्थव्यवस्था को बहुत सावधानी से संभालना होगा.
हर पार्टी अपने राजनीकित फायदे-नुकसान के हिसाब से इस नागरिकता संशोधन कानून का इस्तेमाल कर रही है. सरकार की जिम्मेदारी है कि इस कानून से जुड़े भ्रम दूर करे और अपना स्टैंड साफ करे.
भारी बहुमत से सत्ता में आने के महज छह महीने बाद ही मोदी सरकार उन युवाओं से उलझ पड़ी है, जो कभी उनके घोर समर्थक थे मगर आज उससे निराश, नाउम्मीद और नाराज हैं
जिस गति के साथ पाकिस्तानी राजनेताओं ने जनरल बाजवा के कार्यकाल को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया, वह एक ऐसे देश के लिए चिंताजनक है, जिसका सैन्य तख्तापलट का इतिहास रहा है.
अनुराग कश्यप अब चुप नहीं रह सकते. दीपिका पादुकोण के जेएनयू जाने के बाद उन्होंने उनकी फोटो को अपनी ट्विटर की प्रोफाइल फोटो बना ली है. वो हीं ऐसे निर्माता है जिसकी भारत को जरूरत है.
कस्बाई जीवन के अभ्यस्त अयोध्या के निचले तबकों के लोगों में आशंका घर कर रही है कि विकास के बहाने अयोध्या का अंधाधुंध कारपोरेटीकरण हुआ तो उनका पहले से ही कठिन जीवन और कठिन हो जायेगा.