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Monday, 2 February, 2026
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भारतीय मुसलमानों का प्रतिनिधित्व कौन करता है? सीएए विरोधी प्रदर्शनों से हमें इसका जवाब मिल गया है

किसी राजनीतिक दल की मदद के बगैर सीएए का विरोध कर रहे भारत के मुसलमानों ने एक नई राजनीतिक पहचान कायम की है और उन्होंने नुमाइंदगी के सवाल को भी सुलझा लिया है.

मोदी-शाह के राज में, भाजपा फिर बन गई है भारतीय ‘बनिया’ पार्टी

भाजपा जिस तरह संरक्षणवाद का सहारा लेते हुए बहुराष्ट्रीय कंपनियों का निषेध कर रही है और तकनीक विरोधी पुरातनपंथी धारणाओं की ओर मुड़ रही है उससे यही जाहिर होता है कि मजबूत सरकारें भी जोखिम लेने से कतराती हैं.

गृहमंत्री अमित शाह की कल्पना वाले देश में ना युवा हैं और ना ही युवतियां, सिर्फ ट्रोल्स हैं!

वॉट्सऐप ग्रुप्स पर गृहमंत्री की ऐसी छवि उभरती है जैसे वो प्राचीनकाल के कोई राजा हों जो विश्व जीतने के लिए निकला है. उसके लिए युवाओं का एक ही उपयोग है- सेना में शामिल हो जाना.

सिर्फ भारत की नहीं, सारी दुनिया में जनता सड़कों पर उतर आई है

विरोध-प्रदर्शनों की मुख्य विशेषता यह रही है कि आमतौर पर इनका नेतृत्व कोई स्थापित राजनीतिक दल या नेता नहीं कर रहे हैं, बल्कि इनके प्रति एक व्यापक मोहभंग दिखाई दे रहा है.

परिसंपत्तियों से लेकर चुनावी बॉन्डों तक नेताओं की एक ही रट- ‘हम कागज़ नहीं दिखाएंगे’

सीएए या एनपीआर के नाम पर भारत के लोगों से दस्तावेज़ मांगने से पहले मोदी सरकार उन कागज़ातों को निकाले जो कि राजनीतिक दल छुपाए बैठे हैं.

वर्तमान राजनैतिक हालात में किस पार्टी के लिए ‘दिल्ली’ अभी दूर है

2015 के दिल्ली चुनाव में आदमी पार्टी ने 67 सीटें जीतकर तहलका मचा दिया था. कांग्रेस, मजबूत नेतृत्व के अभाव में शून्य पर सिमट गयी थी और भाजपा को केवल 3 सीटें मिलीं थीं.

जज लोया मामले में जल्दबाज़ी में उठाया गया कोई भी कदम सिर्फ अमित शाह को मज़बूत करने का ही काम करेगा

महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने जज लोया मामले को दोबारा खोलने के संकेत दिए हैं. पर कोई चूक होने पर ये कदम उलटा पड़ जाएगा – राजनीतिक और कानूनी दोनों ही दृष्टियों से.

कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल की जोड़ी का टूटना क्या टीम इंडिया को पड़ रहा है भारी

2017 से लेकर 2019 तक टीम इंडिया को जिन दो गेंदबाजों ने जबरदस्त कामयाबी दिलाई. इन दो गेंदबाजों ने एक जैसी काबिलियत होने के बाद भी विश्व क्रिकेट के बड़े-बड़े बल्लेबाजों को चौंकाया.

कभी मोदी ने युवाओं से कहा था- आज आपने बलिदान नहीं दिया तो कल इतिहास आपको कोसेगा

1976 में नरेंद्र मोदी ने भारत के युवाओं को पत्र में लिखा था- आज की गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, अनैतिकता, भ्रष्टाचार, और चरम यातना कल आपको ही भुगतनी पड़ेगी, तो आप चुप क्यों हैं?

शाहीन बाग, जेएनयू और जामिया प्रदर्शनों ने दिखाया है कि महिलाओं के नेतृत्व की कोई बराबरी नहीं

क्या हमें भारत में हुए ऐसे किसी आंदोलन की याद है जिसमें महिलाओं की नेतृत्वकारी छवि प्रमुखता से उभरी हो ? इन प्रश्नों के उत्तर तलाशते हुए हम फिलहाल चल रहे नागरिकता आंदोलन के सबसे खास पहलू तक पहुंचते हैं : महिलाएं आज राजनीति का व्याकरण लिख रही हैं.

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जयपुर, दो फरवरी (भाषा) राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी जी राम जी) कानून को...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.