सभी नागरिकों को जिसमें दिल्ली के शाहीन बाग में शामिल महिलाएं भी है, उन्हें राइट टू प्रोटेस्ट का अधिकार है जिसमें सरकार का विरोध भी शामिल है. पुलिस उन्हें बंद नहीं कर सकती है.
मूड ऑफ़ द नेशन के सर्वेक्षण से पता चलता है कि भारतीय भाजपा की बहुसंख्यकवादी नीतियों से आश्वस्त नहीं हैं और अर्थव्यवस्था के बारे में चिंतित हैं. लेकिन यह अंत नहीं है.
यूनियन कार्बाइड और भारत सरकार ने जानबूझ कर भोपाल गैस कांड में पीड़ित लोगों की संख्या और पीड़ितों को हुए नुकसान के स्तर को कम करके दिखाया था. इस बारे में एक क्यूरेटिव याचिका अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष है.
हार्दिक पटेल की अभी मुश्किल से चुनाव लड़ने की उम्र हुई है. लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के राजनीतिक व्यवहार से लगता है कि उन्हें बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है. क्यों महत्वपूर्ण है हार्दिक पटेल?
नरेंद्र मोदी-अमित शाह की जोड़ी अगला कौन-सा कदम उठाएगी यह अंदाज़ा लगाना विपक्ष के लिए मुश्किल तो है मगर भाजपा अपने एजेंडा को एक के बाद एक लागू करने में पूरी गंभीरता से जुटी है.
बात 1972 की है, जब इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री (और गृहमंत्री) थीं. मुसलमान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) की स्वायत्तता को सीमित करने वाले कानून का विरोध कर रहे थे. और इसी माहौल में धर्मनिरपेक्ष कांग्रेस ने शासन द्वारा दमन का खाका तैयार किया था.