इस सरकार के रुझान को देखते हुए विपक्ष को सतर्क रहना होगा कि कहीं सरकार राष्ट्रीय स्तर की इस स्वास्थ्य-इमरजेंसी का इस्तेमाल लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन और संविधानेतर शक्तियों को अमल में लाने में ना कर ले.
सौ साल भी नहीं हुए निंजा वायरस हमारी गंगा नदी में इफरात पाए जाते थे. वैज्ञानिक इन्हें बैक्टेरियोफाज कहते हैं. संक्रमण फैलने से रोकने में इनका महत्व समझना चाहिए.
अमेरिका स्थित एक अर्थशास्त्री ने कम-से-कम 20 करोड़ भारतीयों के संक्रमित होने का अनुमान लगाया है पर किसी को उन अवधारणाओं का पता नहीं जिस पर कि ये आंकड़ा आधारित है.
ईश्वर को डरने की जरूरत नहीं है कि कोरोना को न रोक पाने की वजह से उसकी सत्ता कमजोर पड़ जाएगी. न ही लोग ईश्वर से ये पूछने वाले हैं कि जब लोग बीमार हो रहे थे तो वह क्या कर रहा था?
जेलों में इस महामारी को रोकने के लिये सात साल तक की सजा पाये कैदियों की पेरोल पर रिहाई की पेशकश है. क्या भारत में जेल व्यवस्था में सुधार के लिये कोरोनावायरस आपदा ही एकामात्र रास्ता है?
भारत में कोरोनोवायरस की महामारी एक लुंज-पुंज स्वास्थ्य प्रणाली की पृष्ठभूमि में फैल रही है. भारत आज जो विकल्प चुनता है, उसी से भविष्य में शासन और नागरिकों के संबंधों का निर्धारण होगा.
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत के समय उस दौर के दो प्रसिद्ध बुद्धिजीवी और एक्टिविस्ट पेरियार और डॉ. आंबेडकर ने अपनी पत्रिकाओं में क्या लिखा, इसे जानना इनकी विचार प्रक्रिया को समझने में मददगार साबित होगा.