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Monday, 2 March, 2026
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डॉ. भीमराव आंबेडकर को पत्रकार और संपादक क्यों बनना पड़ा

डॉ. आंबेडकर ने अपने सामाजिक/राजनीतिक आंदोलन को मीडिया के माध्यम से भी चलाया और अछूतों के अधिकारों की आवाज़ उठाई.

पाकिस्तान पर आर्टिलरी हमले केवल अच्छे पीआर लाएंगे, अधिक प्रभाव के लिए भारत को बालाकोट की जरूरत है

सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट यह बताने के लिए पहला कदम था कि भारत प्रभाव के लिए प्रतिशोध की ओर बढ़ रहा था.

लॉकडाउन: सूरत शहर में मजदूरों के आक्रोश से उभरे संदेशों की गहराई समझे मोदी सरकार

अब भी वक़्त है कि प्रधानमंत्री लॉकडाउन की मियाद बढ़ाने के ऐलान के साथ ही देश और ख़ासकर मेहनतकश तबके को समझाएं कि मौजूदा चुनौतियों को देखते हुए सरकारें उनके लिए क्या-क्या करने वाली हैं.

कोरोनावायरस संकट के बीच जीवन ही नहीं अब जीविका बचाना भी हो गया है जरूरी

जीवन और जीविका को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता है. ख़ासतौर पर तब, जब इस देश में सोशल सिक्योरिटी नाम की कोई चीज़ नहीं है और सवा अरब लोगों में से 90% से ज़्यादा लोग असंगठित क्षेत्र के भरोसे जीते हैं.

कोरोना महामारी में बाजार का पीछे हटना और राज्यसत्ता की वापसी

जिस बाजार को दुनिया की हर समस्या का समाधान माना जा रहा था, उसने कोरोना महामारी के समय अपने हाथ खींच लिए. वहीं, सरकार, सरकारी अस्पताल, पीडीएस जैसी संस्थाओं की उपयोगिता फिर से साबित हुई है.

सरकार चुनावी मोड से बाहर आकर धीरे-धीरे लॉकडाउन खोले, चिकित्सा व्यवस्था दुरुस्त करे

इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइज़ेशन ने कहा था कि कोरोना वायरस सिर्फ़ एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट नहीं रहा, बल्कि ये एक बड़ा लेबर मार्केट और आर्थिक संकट भी बन गया है जो लोगों को बड़े पैमाने पर प्रभावित करेगा.

महान नेता देश को कुछ बड़ा देने से बनता है- पीएम मोदी अब कह सकते हैं, ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें सरप्राइज दूंगा’

गहरे चिंतन के बाद मेरा यूरेका मोमेंट आया और हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि मोदी जी ने देश को जो दिया है वह है झटका, सरप्राइज.

कोरोनावायरस मोदी के लिए ठीक वक़्त पर कवच कैसे बन गया

नागरिकता कानून का विरोध करने वाले बिखर गए हैं. राज्य सरकारें बेहद जरूरी वित्तीय सहायता के लिए कतार में खड़ी नज़र आ रही हैं और तमाम आर्थिक समस्याओं का ठीकरा मजे से कोरोना के सिर पर फोड़ा जा सकता है.

मोदी के लॉकडाउन ने काम तो किया लेकिन अब भारत को हनुमान के पहाड़ की नहीं बल्कि संजीवनी बूटी की जरूरत है

लॉकडाउन कारगर रहा है मगर इसे ज्यादा खींचने के कई दूसरे दीर्घकालिक नतीजे हो सकते हैं जो इससे हुए फ़ायदों को खत्म कर दे सकते हैं. इसलिए बेहतर यही होगा कि इसे धीरे-धीरे, व्यवस्थित तरीके से वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाए.

भारतीय मतदाता को उदारवादी बचकाना मान रहे हैं पर ये मोदी पर उनकी खिसियाहट भर है

अपने देश में उदारवाद की कहानी में एक बड़ा इंटरवल आ गया है. कहानी में दम अभी भी है, कहानी चलनी चाहिए लेकिन उदारवादी नायक को अंग्रेजी वाली सौतेली मां छोड़ के हिंदी, बंगाली, मलयालम मां के पास आना पड़ेगा.

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होली आपसी सद्भाव, प्रेम और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वांत रंजन

लखनऊ, एक मार्च (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन ने रविवार को कहा कि होली केवल रंगों का...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.