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Sunday, 1 February, 2026
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भारत में कोरोनावायरस की जंग आईएएस अधिकारियों के कंधों पर टिकी है

कोविड-19 जैसे इस अभूतपूर्व सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए आईएएस अधिकारी निरंतर पर्दे के पीछे काम में व्यस्त हैं जबकि उनके राजनीतिक बॉस अंताक्षरी खेल रहे हैं या फिर भव्य वैवाहिक समारोहों में भाग ले रहें हैं.

क्या मजदूरों की परेशानियों के लिए प्रधानमंत्री का माफी मांग लेना काफी है

प्रधानमंत्री द्वारा टीवी पर देशव्यापी लाॅकडाउन का ऐलान किया गया तो देश भर में फैले प्रवासी व दिहाड़ी मजदूरों को इतना अवांछनीय मान लिया गया कि उन्हें ‘स्टे ऐट होम’ के लिए सुभीते से घर पहुंच जाने का मौका भी नहीं दिया.

टीबी से लड़ी गई भारत की लंबी लड़ाई में छिपे हैं कोविड-19 से निपटने के तीन सबक

ट्यूबरकुलोसिस से हमने जो लड़ाई लड़ी है उसे याद करनी की जरूरत है. टीबी के खिलाफ लड़ी गई शताब्दी लंबी लड़ाई से भारत कई पाठ सीख सकता है जो अभी भी वैश्विक तौर पर हर साल हज़ारों लोगों की मृत्यु का कारण बनती है.

कोरोनावायरस को लेकर हो रही सरकार की आलोचना को देश की आलोचना न समझें

इस बीच, सरकार और व्यवस्था की कई खामियां और लापरवाहियां भी सामने आई हैं. कई कदम ऐसे हैं, जिन्हें शायद पहले उठाया जाना चाहिए था.

कोरोनावायरस महामारी से ये पांच सबक सीख सकते हैं भारतीय

यदि हम कोवि़ड-19 द्वारा दिए जा रहे संकेतों पर गौर करें, तो हमें अपने सहज ज्ञान पर गहन मंथन करने में मदद मिल सकती है.

कोरोना के मामले में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शुरू में ही बरती घोर लापरवाही

कोरोना के बारे में चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) को 31 दिसंबर 2019 को सूचित किया. लेकिन इस बात के प्रमाण मिले हैं कि इसके वायरस अक्टूबर 19 के मध्य में ही मनुष्यों के बीच फैल चुके थे फिर भी डब्लूएचओ ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई.

कोविड-19 जैसा संकट देश की मजबूती और कमजोरी का भी खुलासा कर देता है

इस काले दौर को गुजरने में हफ्तों, महीनों लग सकते हैं और इसके चलते भारत की आर्थिक वृद्धि दर में भी भारी गिरावट के अनुमान लगाए जा सकते हैं और इसकी बेरोजगारी, आवश्यक जरूरतों के लिए सरकारी संसाधन के सीमित होने जैसी कीमतें चुकानी पड़ सकती हैं.

भारत के धनवान भगवान और सरकार को तो खुशी से दान देते हैं लेकिन जरूरतमंदों और गरीबों की मदद करना क्यों उन्हें गंवारा नहीं

चाहे अमिताभ बच्चन हों या विराट कोहली, भारत के धनवान और प्रसिद्ध लोग लेक्चर देने या प्रधानमंत्री मोदी की बातों का अनुसरण करने के लिए तत्पर रहते हैं. लेकिन अधिकांश भारतीयों में निस्वार्थ दान की प्रवृति का अभाव है.

क्यों 136 करोड़ भारतीय हाथ पर हाथ धरे कोरोना को कहर ढाने की छूट नहीं दे सकते

कोरोनावायरस से कितने भारतीय संक्रमित हो सकते हैं या कितने मौत के मुंह में समा सकते हैं इसको लेकर कई भयावह आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं जिन्हें सुनकर ऐसा लगता है मानो हम अपनी किस्मत बदलने के लिए कुछ नहीं करेंगे, हाथ पर हाथ धरे बैठे ही रहेंगे.

सरकारों ने लॉकडाउन का आदेश दिया है पर मध्य भारत में बुरे समय में एक अच्छी खबर है

मध्य भारत के दण्डकारण्य क्षेत्र में लगभग 5 करोड़ लोग रहते हैं, जिनमें से अधिकतर इस 50 साल से अधिक समय से चल रहे इस गृहयुद्ध से बेहद परेशान हैं.

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