तबलीगी जमात के लोग अपने कृत्यों से दो तरह का नुकसान कर रहे हैं. पहला तो कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सरकार व समाज के अभूतपूर्व प्रयासों में पलीता लगा रहे हैं और दूसरा अपने समुदाय के प्रति समाज में घृणा और अविश्वास की भावना को बल देने का काम भी जानबूझकर कर रहे हैं.
मुंबई की झुग्गी बस्तियों में कोरोनावायरस के प्रसार को देखते हुए उद्धव ठाकरे की राज्य सरकार से इस पर नियंत्रण की अधिक उम्मीद नहीं की जा सकती है. सरकार अब तक अनेक बड़ी गलतियां कर चुकी है.
भारत कोई पिकनिक नहीं मना रहा है मगर ऐसा भी नहीं है कि यहां लाशों के ढेर लग रहे हैं, अस्पतालों में मरीजों को बिस्तर की कमी पड़ रही है, श्मशानों में लकड़ी की या कब्रिस्तानों में जगह की कमी पड़ रही है.
अब जब देश में कोविड-19 महामारी ने पैर पसार लिया है तो जरूरत है कि मृत्यु पंजीकरण पद्धति में सुधार किया जाए, जिससे यह पता लगाने में मदद मिले की आखिर मौत की वजह क्या है.
कोरोना महामारी की विकरालता ने इन दोनों देशों को लचीला रुख अपनाने की शालीनता दिखाते हुए अपने-अपने भावुक नागरिकों को एक समझौते की ओर ले जाने का अवसर दिया है.
किसी भी युद्ध को जीतने तो क्या, शुरू करने की कुंजी यह होती है कि उसका लक्ष्य स्पष्ट हो. यह पूरी तरह से राजनीतिक विषय होता है. यह न तो भावनात्मक मामला होता है, और न ही शुद्ध रूप से सैन्य मामला.