#CutTheClutter के 467वें एपिसोड में शेखर गुप्त बता रहे हैं कि चीन के व्यापार में घुस पाना आसान नहीं लेकिन कुछ एरिया हैं, पर उसके लिए काफी मेहनत करनी होगी.
कोरोनावायरस के बाद की दुनिया में, जब सोशल डिस्टेंसिंग एक आम बात हो जाएगी, तो कच्चे तेल के सस्ते अंतर्राष्ट्रीय दामों की बदौलत, भारत के एविएशन सिस्टम में उछाल आने वाला है.
अमेरिका ने एंटीजन टेस्ट को पास कर दिया है यह न केवल पांच मिनट में कोविड-19 संक्रमण का परिणाम देता है बल्कि यह पहले से चले आ रहे आरटीपीसीआर टेस्ट से काफी सस्ता भी है.
श्रम बाज़ार में उदारीकरण से श्रमिकों के लिए रोज़गार के अवसर पैदा होते हैं. उदाहरण के लिए, भारत की एक औसत कपड़ा कंपनी में 240 कर्मचारी होते हैं, जबकि बांग्लादेश में करीब 800.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दबदबे का चाहे जो बखान किया जाता रहा हो, आज हकीकत यह है कि भाजपा का वैचारिक संरक्षक यह संगठन नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में हाशिये पर पड़ा दिख रहा है.
रघुराम राजन और अभिजीत बनर्जी के साथ राहुल गांधी की बातचीत और साथ ही ज़ूम प्रेस वार्ताओं से साफ़ ज़ाहिर है, कि कांग्रेस लीडर अब वापसी के अंदाज़ में हैं.
कोविड काल में पैदा हुई परिस्थिति को अवसर के रूप में भुनाते हुए रोजगार सृजन के लिए श्रम कानून की जटिलताओं में ढील देनी जरूरी थी. इसके लिए श्रम कानून के जिन प्रावधानों को निरस्त किया गया है, उससे ना तो लाखों मजदूरों को पहले कोई कोई लाभ था और ना ही अब कोई हानि होनी है.
लाखों लोग ऐसे हैं जो रोजगार को अब यादों का हिस्सा मान कर कामगारों की जमात से अलग हो चुके हैं. बढ़ती आबादी में छोटे वर्कफोर्स के कारण अर्थव्यवस्था की उत्पादकता को झटका लगेगा
जो बात मुझे परेशान करती है, वह यह है कि हर चीज़ को बहुत जल्दी वफादारी की कसौटी पर कसा जाने लगता है. जैसे भारतीय मुसलमानों को एक तरह से सोचना चाहिए और भारतीय हिंदुओं को दूसरी तरह से. इसका अंत कहां है?