सात प्वाइंट के चार्टर में कहा गया है कि मजदूर जो वापस गए हैं उसे सरकार के खर्चे पर वापस लाया जाए. वहीं कोविड-19 में जो फ्रंटलाइन पर लोग काम कर रहे हैं उन्हें सारी सुविधाएं दी जाए.
बड़े-बड़े आंकड़ों ने केजरीवाल की राजनीति को निर्धारित किया है, चाहे 2जी घोटाले के आंकड़ों पर केंद्रित उनका भ्रष्टाचार विरोधी अभियान हो या कोविड पर अपनी सरकार की उपलब्धियों संबंधी उनके दावे.
नरेंद्र मोदी काफी हद तक नौकरशाही पर निर्भर रहते हैं. लेकिन नौकरशाही में रचनात्मकता यानी क्रिएटिविटी और व्यक्तिगत रूप से पहल लेने की प्रवृत्ति का अभाव होता है. संकटकाल में नौकरशाही असरदार नहीं रह जाती.
कई लोगों का मानना है कि टेलिकॉम जैसे प्रतिस्पर्द्धी कारोबार में बेहद बड़ा निवेश कभी भी उपयुक्त लाभ नहीं दे सकता, लेकिन मुकेश अंबानी ने एक-के-बाद-एक सौदे करके उन लोगों को गलत साबित किया है.
संसद नीति निर्धारण करने वाली देश की सर्वोच्च संस्था है. मौजूदा संकट के समय नीतियां बनाने के महत्व को समझना मुश्किल नहीं है. साथ ही संसद सरकार को जवाबदेह भी बनाती है.
दीन दयाल उपाध्याय की हत्या और माधवराव सिंधिया के प्लेन क्रैश से लेकर गांधी परिवार की हत्याओं तक, राजनीति में जो कुछ भी होता है, उसका हिसाब-किताब से कम और किस्मत से ज़्यादा लेना-देना होता है.