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Friday, 30 January, 2026
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कांग्रेस तीन पार्टियों में बंटी हुई है, लेकिन एक को भी ठीक से राजनीति करनी नहीं आती

मज़दूरों का संकट कांग्रेस में जान फूंकने वाला अवसर था, लेकिन उसे इसका इस्तेमाल करना नहीं आया.

अर्थशास्त्रियों ने कोविड का मुकाबला करने के लिए मोदी को 7 पॉइंट के चार्टर से दिया सुझाव, मजदूरों की मदद पर जोर

सात प्वाइंट के चार्टर में कहा गया है कि मजदूर जो वापस गए हैं उसे सरकार के खर्चे पर वापस लाया जाए. वहीं कोविड-19 में जो फ्रंटलाइन पर लोग काम कर रहे हैं उन्हें सारी सुविधाएं दी जाए.

लॉकडाउन में निर्मला सीतारमण का गुस्सा मोदी सरकार की छवि बिगाड़ रहा है

अगर निर्मला सीतारमण का गुस्सा भारत को उनकी प्रेसवार्ता से दूर करता है तो उन्हें अरुण जेटली और सोनिया गांधी से कुछ सबक लेना चाहिए.

हनुमान के संजीवनी लाने का इंतज़ार करते आईआईटी की उपज केजरीवाल कोविड के आंकड़ों में उलझे

बड़े-बड़े आंकड़ों ने केजरीवाल की राजनीति को निर्धारित किया है, चाहे 2जी घोटाले के आंकड़ों पर केंद्रित उनका भ्रष्टाचार विरोधी अभियान हो या कोविड पर अपनी सरकार की उपलब्धियों संबंधी उनके दावे.

कुछ लोग कोरोना की ओर से भी लड़ रहे हैं. नदी, जंगल, पहाड़ सब डरे हुए हैं, हमें भी डरना चाहिए

चिढ़ियों की चहचहाहट, नीला आकाश, आकाश में तारे और साफ नदियां यह बता रहीं है कि प्रकृति अपनी धरती को फिर हासिल कर रही है.

कोरोना संकट के दौर में नौकरशाही ने नरेंद्र मोदी को निराश किया

नरेंद्र मोदी काफी हद तक नौकरशाही पर निर्भर रहते हैं. लेकिन नौकरशाही में रचनात्मकता यानी क्रिएटिविटी और व्यक्तिगत रूप से पहल लेने की प्रवृत्ति का अभाव होता है. संकटकाल में नौकरशाही असरदार नहीं रह जाती.

कोरोना काल में ‘विपक्षी एकजुटता’ की नीयत महामारी के खिलाफ है या मोदी के खिलाफ ?

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जब देश लड़ रहा है तब कांग्रेस और उसके सहयोगी दल आलोचना और अवरोध के नए अवसर खोजने में मशगूल हैं.

पिता धीरूभाई की सीख और रणनीतिक फैसलों से कैसे मुकेश अंबानी ने डिजिटल मार्केट में अपनी पैठ बढ़ाई

कई लोगों का मानना है कि टेलिकॉम जैसे प्रतिस्पर्द्धी कारोबार में बेहद बड़ा निवेश कभी भी उपयुक्त लाभ नहीं दे सकता, लेकिन मुकेश अंबानी ने एक-के-बाद-एक सौदे करके उन लोगों को गलत साबित किया है.

भारत में आई एक ही आपदा ने PM, CM, DM जैसे तीन बड़े शक्तिशाली लोगों की पोल खोल दी है

पीएम, सीएम, डीएम—भारतीय शासन रूपी रेल के तीन इंजन हैं, और कोरोनावायरस की महामारी से निपटने में ये तीनों केवल गफलत करते नज़र आ रहे हैं.

कोरोना संकट में लगभग सौ देशों की संसद सक्रिय लेकिन भारत की संसद आखिर क्यों मौन है

संसद नीति निर्धारण करने वाली देश की सर्वोच्च संस्था है. मौजूदा संकट के समय नीतियां बनाने के महत्व को समझना मुश्किल नहीं है. साथ ही संसद सरकार को जवाबदेह भी बनाती है.

मत-विमत

अजित पवार की मौत ने भारतीय राजनीति में एक और ‘क्या होता अगर’ वाली बहस छोड़ दी है

दीन दयाल उपाध्याय की हत्या और माधवराव सिंधिया के प्लेन क्रैश से लेकर गांधी परिवार की हत्याओं तक, राजनीति में जो कुछ भी होता है, उसका हिसाब-किताब से कम और किस्मत से ज़्यादा लेना-देना होता है.

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सहारनपुर में ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकराकर स्कूटी सवार दो युवकों की मौत

सहारनपुर (उप्र), 30 जनवरी (भाषा) सहारनपुर जिले बिहारीगढ़ थाना क्षेत्र में ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर से स्कूटी सवार दो युवकों की मौत हो गई।...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.