नई शिक्षा नीति में जेन्डर – समावेशी कोष की स्थापना एक नया और क्रांतिकारी कदम है. लेकिन ये प्रावधान स्त्रियों के लिए तय किये गए सामाजिक मापदंडों और घरेलू कार्यों के बोझ से मुक्त करवा कर क्या उन्हें विद्या के मंदिरों तक ले जा पाएंगे?
इस साल के बजट में वित्तीय घाटा जीडीपी के 3.5 प्रतिशत के बराबर रहने का अनुमान लगाया गया था मगर कोरोना महामारी और लॉकडाउन के प्रभावों के चलते यह संभव नहीं दिख रहा है.
इंदिरा गांधी की ही स्टाइल में हाईकमान कल्चर से पार्टी चलाने का गुण उनके समय में अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत करने वाले बाल ठाकरे और कांशीराम में भी आया.
डॉन के रिश्तेदार जावेद मियांदाद ने सियासत में आने की मंशा का ऐलान किया. एक दिन वो पाकिस्तान के वज़ीरे आज़म बन सकते हैं लेकिन बिना दाऊद वाले पाकिस्तान के.
केंद्र एलएसी पर भारतीय भूमि की रक्षा करने में नाकाम रहा है, लेकिन मोदी सरकार पर एकमात्र दबाव पत्रकारों और विश्लेषकों के एक समूह से ही पड़ता दिख रहा है.
अपंग सैनिकों की पेंशन पर आया आदेश बताता है कि पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए बने विभाग पर नज़र रखने के वास्ते देश में सेवानिवृत्त सैनिकों के मामलों के लिए अलग मंत्रालय की जरूरत क्यों है.
बाकी जातियों के लोगों को एससी-एसटी या ओबीसी कटेगरी के अंदर रखा जाता है और सवर्ण जातियां जनरल कास्ट बन जाती हैं. सवर्णों के लिए जाति एक ड्रेस है, जिसे पहना और उतारा जा सकता है.
जब वामपंथी दल आक्रामक तरीके से हिंदू वोटों में सेंध लगा रहे हैं, तो बीजेपी के लिए तुरंत फायदा अपने कोर वोट बैंक को मजबूत करने में हो सकता है, उससे पहले कि वह अपना दायरा और फैलाए.