लोकतंत्र के मंदिर संसद में आधा सच या आधा झूठ बोलने के लिए किसी एक मंत्री को हम दोष न दें. आखिर, लोगों को तो कोई शिकायत नहीं है. प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता बुलंद है. इसलिए, ‘उत्तर-सत्य’ दौर की राजनीति की हकीकत को कबूल करना सीखिए.
गिलगित-बाल्टिस्तान का पाकिस्तान में 'समावेश' क्षेत्र में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे संबंधी क्रियाकलापों को वैधता प्रधान करेगा, और बीजिंग को वहां अपनी पैठ बढ़ाने का अवसर दे सकेगा.
केवल मोदी सरकार और भाजपा ही नहीं बल्कि राज्य सरकारों से लेकर अदालतें तक सब शक की मानसिकता के शिकार हो गए दिख रहे हैं, क्या भारत एक ‘राष्ट्रीय शक्की देश’ बनता जा रहा है?
यूपीएसएसएफ़ के गठन के पीछे योगी सरकार का अपने विरोधियों पर अपने ही इशारे पर मनमानी कार्रवाइयां कराने का मंसूबा है, जो दलितों, पिछड़ों, ग़रीबों और अल्पसंख्यकों के निर्मम दमन तक जायेगा ही जायेगा.
प्रधानमंत्री मोदी की नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी के बावजूद इस क्षेत्र में चीन के बीआरआई की आर्थिक पकड़ ज्यादा मजबूत है. क्या भारत की विदेश नीति में बदलाव की जरूरत है?
एएपीआई डेटा के हालिया सर्वे में 65 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकियों ने आगामी राष्ट्रपति चुनाव में डोनल्ड ट्रंप के बजाय जो बाइडेन को वोट देने का इरादा जताया है.
जब वामपंथी दल आक्रामक तरीके से हिंदू वोटों में सेंध लगा रहे हैं, तो बीजेपी के लिए तुरंत फायदा अपने कोर वोट बैंक को मजबूत करने में हो सकता है, उससे पहले कि वह अपना दायरा और फैलाए.