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Tuesday, 27 January, 2026
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कोविड के ‘न्यू नॉर्मल’ में क्या भारतीय संसद को भी वर्चुअल चलाने का समय आ गया है

जब वर्तमान वैश्विक महामारी ने लगभग सभी क्षेत्रों और संस्थाओं को अपनी रीति-नीति को बदलने पर विवश कर दिया है तो संसद भी इससे अछूती क्यों रहे ? भारतीय संसद को वे सभी जरूरी बदलाव करने के बारे में सोचना चाहिए जो किसी भी राष्ट्रीय संकट, आपदा या महामारी की स्थिति में उसे अपने जरूरी दायित्वों का निर्वाह करने के लिए सक्षम बना सके.

कृषि सुधार विधेयक महज एक शुरुआत है, 1991 के सुधारों से इसकी तुलना न करें

सरकार इस सिद्धांत पर चलती दिख रही है कि किसानों को अपनी पसंद से किसी को भी, कभी भी अपने उत्पाद बेचने की आज़ादी हो. लेकिन थोक में खरीद करने वाले विशाल फूड प्रोसेसरों या रिटेल चेनों के आगे छोटे किसानों को वास्तव में क्या आज़ादी मिलेगी?

CBI-NIA के साए में लंबे समय तक गुमनाम रही NCB अब अपनी लोकप्रियता का मज़ा ले रही है

कुछ बॉलीवुड ए-लिस्टर्स और उनकी व्हाट्सएप पर बातचीत की बदौलत नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो अब बहुत से ईवनिंग न्यूज़ कार्यक्रमों के केंद्र में आ गया है.

योगी आदित्यनाथ सरकार का ऑपरेशन दुराचारी भी एंटी-रोमियो स्क्वॉड की ही तरह एक खराब फैसला है

इसे भले ही योगी आदित्यनाथ का मास्टरस्ट्रोक कहें लेकिन इसका केंद्रीय सिद्धांत 'पब्लिक शेमिंग' ही लग रहा है. पब्लिक शेमिंग एक तरह से खतरनाक 'स्वयं घोषित रक्षक' पैदा करती है जो धीरे-धीरे कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार कर देते हैं.

मोदी अगर सच्चे सुधारक हैं तो वे वोडाफोन के प्रेत को दफन करेंगे और बिहार के चुनाव प्रचार में आर्थिक सुधारों को मुद्दा बनाएंगे

हम देख चुके हैं कि चुनावों में आर्थिक सुधारों और वृद्धि आदि की बात करने का क्या हश्र होता है, खासकर तब जब आप दोबारा सत्ता में आने के लिए लड़ रहे हों, इसलिए बिहार के इस अहम चुनाव में कोई ‘पंगा’ न लेना ही मोदी को मुफीद नज़र आएगा.

मनमोहन सिंह की अर्थ नीति में चीन से बहुत पीछे कैसे छूट गया भारत

चीन इस समय वैश्विक आर्थिक ताकतों में से एक है. प्रति व्यक्ति आमदनी में वह संपन्न देशों के बराबर है, वहीं विनिर्माण में सबसे आगे निकल चुका है. वहीं 1990 तक करीब हर मोर्चे पर चीन से आगे रहा भारत अब उससे बहुत पीछे छूट चुका .

बिहार चुनाव में सीधे जीतना भाजपा के लिए मुश्किल, लेकिन हारने के बाद जीतना आसान है

किसान विरोधी बिल, मजदूर विरोधी बिल, सीएए-एनआरसी, गिरती जीडीपी, बिहार में बाढ़ की बदहाली, रोजगार के अभाव जैसी परिस्थितियों में बिहार में भाजपा-एनडीए बहुमत पाना भले ही मुश्किल हो, लेकिन चुनाव बाद अन्य दलों के विधायकों को अपनी तरफ खींचना उसके लिए काफी आसान हो सकता है.

दीनदयाल उपाध्याय की हत्या किसने की? ये एक 50 साल पुराना सवाल है

भारतीय जनसंघ के प्रमुख दीनदयाल उपाध्याय की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मौत को पांच दशक से अधिक समय बीच चुका है लेकिन अभी तक इस बात का जवाब नहीं मिल सका है कि उनकी हत्या किसने और क्यों की.

चीन मसले पर राजनाथ सिंह की परफॉर्मेंस दर्शाती है कि मोदी और शाह को उनकी जरूरत क्यों है

लद्दाख में चीनी आक्रामकता के मुद्दे पर राजनाथ सिंह ने संसद में जो कर दिखाया, वह शायद मोदी सरकार का कोई और मंत्री, यहां तक कि अमित शाह भी नहीं कर पाते.

मोदी सरकार के कार्यकाल में किसानों का विरोध प्रदर्शन 700% बढ़ा – इसी का नतीजा हैं 3 कृषि विधेयक

किसान 2014 से पहले ज़्यादातर, राज्य या स्थानीय स्तर पर, छोटे विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. मोदी सरकार का अपने वादे पर निष्क्रिय बने रहने से उनका आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर हुआ.

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राहुल गांधी को गृह मंत्री अमित शाह से ज्यादा सहकारिता मंत्री अमित शाह की चिंता क्यों करनी चाहिए

सहकारिता मंत्रालय युद्धस्तर पर काम कर रहा है. भले ही सहकारी समितियां राज्य सूची में आती हों, लेकिन केंद्र इस क्षेत्र को सुव्यवस्थित और फिर से मजबूत बनाने की पूरी कोशिश कर रहा है.

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भारत का ऊर्जा क्षेत्र 500 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश के अवसर देता है: प्रधानमंत्री मोदी

(तस्वीर के साथ) नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत का ऊर्जा क्षेत्र 500 अरब अमेरिकी...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.