शिक्षा, आरक्षण, और सरकारी नौकरी समता और सम्मान दिलाने का लिए है लेकिन हम इससे कितने दूर हैं यह मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंके जाने और हरियाणा के IPS अफसर की आत्महत्या से साफ है. फिल्म ‘होमबाउंड’ एक सबक भी सिखाती है.
तमाम संगठन समय के साथ बदलते हैं, संघ ने भी शायद खुद को बदला है. लेकिन इसका अतीत इस पर राजनीतिक हमले करने के लिए इसके आलोचकों को आसानी से हथियार उपलब्ध कराता है.
1948 में जब इज़रायलियों ने अरबों को खदेड़ा था, तो उन्होंने यह नहीं सोचा था कि ये कटु शरणार्थी उनके नए राज्य के लिए एक स्थायी ख़तरा बन जाएंगे. यह एक भयावह ग़लतफ़हमी थी.
जब उस यूट्यूबर ने, जिसने CJI बी आर गवई के खिलाफ हंगामा मचाया, पुलिस स्टेशन जाने के बाद सोशल मीडिया पर घमंड करते हुए कहा कि ‘सिस्टम हमारा है’, तो दलितों के लिए क्या उम्मीद बचती है?
उत्तराखंड के पास भारत का पहला शून्य-गरीबी वाला राज्य बनने की तकनीक, धन और प्रशासनिक क्षमता है, जिससे यह पहले दो सस्टेनेबल डेवलमेंट गोल्स (SDGs) को पूरा कर सकता है.
किसी दूसरे देश के मुकाबले चीन में उसके उच्चस्तरीय विश्वविद्यालयों से हर साल जितने ग्रेजुएट निकलते हैं उनमें ‘स्टेम’ (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजिनियरिंग, मैथेमेटिक्स) के स्टूडेंट्स की संख्या काफी बड़ी होती है.
अगर भारत में प्रतिस्पर्धा कमजोर हो जाए तो इसे विदेशों में बचाया नहीं जा सकता. शॉर्ट टर्म कदम सहारा दे सकते हैं, लेकिन सुधारों के बिना, निर्यातक हमेशा कमजोर बने रहेंगे.
अमित शाह को लद्दाख में जनता की भावना के बारे में बेहतर जानकारी होनी चाहिए थी, यह देखते हुए कि पार्टी 2014 और 2019 में जीतने के बाद 2024 का लोकसभा चुनाव एक निर्दलीय उम्मीदवार से हार गई.