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Tuesday, 13 January, 2026
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योगी नहीं, मायावती, अखिलेश, राहुल की विफलता, 2017 के बाद से यूपी की बड़ी राजनीतिक कहानी है

जबकि एक साल बाद ही यूपी विधानसभा का चुनाव होने वाला है, सभी विपक्षी दल—सपा, बसपा, कांग्रेस और रालोद भी— जहां के तहां खड़े नज़र आ रहे हैं. वे एक कदम भी आगे बढ़े हों ऐसा नहीं दिखता.

नरेंद्र मोदी देश पर ऐसे राज कर रहे हैं मानो भारत एक राज्य है और वह अब भी एक मुख्यमंत्री हैं

 प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय राजधानी में उन्हीं पैंतरों को आजमाया है जो उन्हें भली भांति समझ आते हैं—'सीएम मॉडल ऑफ गवर्नेंस’ की जांची-परखी कार्यशैली.

‘रन ऑफ दि रिवर’ जैसी फर्जी तकनीकों से लोगों को बेवकूफ बनाया जा सकता है, हिमालय को नहीं

बहरहाल चमोली के इस आमंत्रित हादसे में सौ से ज्यादा लोगों की बलि दी गई है. चूंकि बलि मजदूरों की दी गई है इसलिए मामला जल्दी ही शांत हो जाएगा. विकास की गति तेज है उसे रोका नहीं जा सकता.

क्यों प्रधानमंत्री मोदी को अपने इर्द-गिर्द जमा कागजी शेरों को लेकर चिंता होनी चाहिए

प्रधानमंत्री मोदी के कागजी शेर टीवी और ट्विटर पर विपक्ष के खिलाफ खूब दहाड़ते हैं, लेकिन उनमें से कोई भी लुटियंस की दिल्ली से निकलकर सिंघू, टिकरी और गाज़ीपुर बॉर्डर तक नहीं जाता.

लोकतांत्रिक सूचकांक में भारत का फिसलना चिंताजनक, क्या लोकतंत्र सच में कल्पना में रह गया है

जब हमारे सत्ताधीश हमारे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का आधा हिस्सा हजम कर गये हैं, हम क्या कर रहे हैं? उसे दुनिया का सबसे बढ़िया लोकतंत्र बनाने का कोई सपना हमारे पास बचा है या नहीं?

कृषि कानूनों पर मोदी सरकार को व्यापक स्वीकृति हासिल करनी होगी

किसान ही नहीं, दूसरे तबकों को भी यकीन होने लगा है कि दिल्ली की गद्दी पर बैठी सरकार अब उसका प्रतिनिधित्व नहीं करती. इसका अर्थ यह हुआ कि सरकार चाहे बड़ी आसानी से कानून बना ले, उसे देखना होगा कि उन्हें व्यापक स्वीकृति कैसे हासिल होगी.

सिख अलगाववाद के वजूद की लड़ाई लड़ रहा है, किसान आंदोलन से अगर ढंग से न निपटे तो आग लग सकती है

पंजाब में जरनैल सिंह भिंडरांवाले की आज कुछ-कुछ वैसी ही स्थिति है जैसी 1970 के दशक में चे ग्वेरा की स्थिति युवाओं के बीच थी.

मोदी सरकार कृषि कानून की लड़ाई हार चुकी है, अब सिख अलगाववाद का प्रेत जगाना बड़ी चूक होगी

कृषि क़ानूनों पर जंग तो मोदी सरकार हार ही चुकी है, अब अगर वह किसानों के आंदोलन को लेकर सिख अलगाववाद का राग अलापती रहेगी तो और भी गंभीर भूल करेगी

समय आ गया है कि मोदी एक बड़े राजनेता की भूमिका निभाएं और कृषि कानूनों को रद्द करें

नरेंद्र मोदी कृषि कानूनों को रदद् करने के बजाये उन्हें रद्द नहीं करके अपनी राजनीतिक साख ज्यादा गंवा रहे हैं.

शिक्षा क्षेत्र को बजट 2021 में क्या मिला, राज्य और केंद्र को स्कूलों में निवेश बढ़ाना चाहिए

बजट 2021 में शिक्षा क्षेत्र में हुए आवंटन की बात करें तो इस वर्ष शिक्षा क्षेत्र को 93,224.31 करोड़ रूपये आवंटित हुए है जो कि पिछले साल से 6087 करोड़ रूपये कम है.

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जेन-Z आंदोलन के बाद फिर पुरानी राजनीति, नेपाल की पार्टियां ‘स्टार्टिंग पॉइंट’ पर लौटीं

एक स्थिर नेपाल के लिए आगे का रास्ता लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने, समावेशी संवाद के जरिए राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने और कानून के शासन को बनाए रखने में है.

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वित्त मंत्रालय का बीमा कंपनियों को निर्देश, शिकायतों का समय पर निपटान सुनिश्चित करें

नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने मंगलवार को सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों से ग्राहकों को कुशल...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.