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Sunday, 12 April, 2026
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हादसे तो होते हैं लेकिन IAF प्रमुख का MiG-21 बाइसन उड़ाना दिखाता है कि लीडर आगे आकर मोर्चा संभालते हैं

भारतीय वायुसेना में किसी मौत के बाद सभी फ्लाइंग कैडेट को उनके उड़ान प्रशिक्षक एक उड़ान पर ले जाते हैं. यह विमान के प्रति उनके भरोसे को फिर से कायम करता है.

भारत के सामने लातिन अमेरिका जैसा बनने का खतरा, वित्तीय स्थिति को बेहतर ढंग से संभालने की जरूरत

अगर भारत में घोर असमानता के साथ एक के बाद अगली पीढ़ी की स्थिति में बेहतरी नहीं होती तो वह तेज आर्थिक वृद्धि दर वाला पूर्वी एशिया न बनकर बुरा प्रदर्शन कर रहे लातिन अमेरिका जैसा बन जाएगा.

मौत और पत्रकारिता: भारत में कोविड से मौत के आंकड़े कम बताए गए, क्या बंटवारे से दोगुनी मौतें हुईं

पिछले तीन महीने देश सबसे गंभीर राष्ट्रीय त्रासदी से गुजरा और कोविड से हुई मौतों के आंकड़े कम करके बताए गए लेकिन बड़े पैमाने पर इस तरह की कोशिश एक गंभीर मसला है.

शाह महमूद कुरैशी को फिलिस्तीन युद्धविराम के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दें, उनका CNN इंटरव्यू भूल जाएं

अगर कुरैशी की पूर्व में राष्ट्रीय टेलीविजन पर मौजूदगी को देखा जाए तो सीएनएन को फिर भी पाकिस्तानी विदेश मंत्री का सबसे अच्छा वर्जन देखने को मिला है.

मार्क्स के पोते ने की थी सावरकर की पैरवी, भारत के मार्क्सवादियों द्वारा उनका विरोध कितना तर्कसंगत

लोंगुएट की दलीलों का सार यही था कि सावरकर एक भारतीय क्रांतिकारी व प्रबुद्ध विचारक हैं और भारत को आजाद करवाने के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, इसलिए ब्रिटिश सरकार उनके पीछे पड़ी है.

कोरोना टूलकिट तैयार है, गंगा, हिमालय, सोशल मीडिया बंद होने की अफवाह और भी बहुत कुछ है इसमें

घरेलू सीवेज जिसमें मानव मल की मात्रा होती है, यह गंगा में पहले की तरह ही आ रहा है और यही वह तत्व है जो पानी को सर्वाधिक प्रदूषित करता है लेकिन पानी के रंग में कोई बदलाव नहीं आता.

मुझे क्यों ऐसा लगता है कि राजीव गांधी पर छद्म नाम से लेख सोनिया या प्रियंका ने नहीं, राहुल ने लिखा होगा

जैसे जवाहरलाल नेहरू 1930 के दशक में और नरसिंह राव 1970 के दशक में कॉंग्रेस के हालात से असंतुष्ट थे उसी तरह राहुल गांधी आज नाखुश हैं.

मोदी कोई मनमोहन सिंह नहीं जो अफसाने के अंजाम पर पहुंचने से पहले अलविदा कह दें

शपथ ग्रहण के बाद के सात सालों में मोदी सरकार जितना अभी डांवाडोल है उतना पहले कभी नहीं रही. लेकिन अभी भी कोई विकल्प मौजूद नहीं है.

‘छोकरी’ शब्द पर आपत्ति क्यों? इसे सही संदर्भ में देखने की जरूरत, आलोचना केवल आलोचना के लिए न करें

किसी भी रचना को उसके संदर्भ में समझना बेहद जरूरी है. आलोचना केवल आलोचना करने के उद्देश्य से ही नहीं की जानी चाहिए. आलोचना के पीछे पुख्ता और ठोस कारण होना चाहिए.

तिहाड़ से उमर खालिद ने कहा- जेल में एक भी दिन या रात एंग्जायटी के बगैर नहीं कटती

मुझे पांच मिनट के फोन कॉल या दस मिनट के वीडियो कॉल का बेसब्री से इंतजार रहता है. लेकिन जैसे ही हम बातें करना शुरू करते हैं, टाइमर बंद हो जाता है. इससे पहले मैंने कभी भी हर सेकेंड की कीमत का एहसास इस सिद्दत के साथ नहीं किया है.

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बहुमत नहीं मिलने पर तृणमूल उम्मीदवारों से समर्थन के लिए धमका रही है भाजपा: ममता

कोलकाता, 12 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राज्य मंत्रियों सहित...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.