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Monday, 16 March, 2026
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मई दिवस- मोदी सरकार ने कैसे भारत को एक भयानक संकट के बीच लाकर खड़ा कर दिया

किसी ने यह देखने की कोशिश नहीं की कि भारत के पास पर्याप्त वैक्सीन, ऑक्सीजन, रेमडिसिविर दवा है या नहीं. अब देश ऐसे संकट में फंस गया है कि चार दशक बाद हम विदेशी मदद के मोहताज हो गए.

क्या अशोक लवासा मामले ने EC को पूरी तरह बदल दिया ? भारत को क्यों एक और टीएन शेषन की जरूरत है : EX-IAS...

चुनाव आयुक्तों को पश्चिम बंगाल में उतावलेपन पर काबू पाना चाहिए था, लेकिन उनके पक्षपातपूर्ण रवैये ने सिविल सेवाओं के बारे में नकारात्मक छवि को मजबूत ही किया है.

2021 के चुनाव ने बंगाल के अनूठेपन को खत्म किया, सूबे और देश में अब चुनाव अमेरिकी तर्ज पर लड़े जाएंगे

लंबे अरसे तक बंगाल में दलगत प्रतिद्वन्द्विता अनूठी बनी रही. चुनाव अभियानों में तब राजनीतिक कार्यकर्ता विचारधारा की भाषा बोला करते थे. लेकिन अब ऐसा नहीं रहा.

क्या ‘लाटसाहब’ के पास जादुई छड़ी है कि घुमाते ही कोरोना से बेहाल दिल्ली की स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हो जाएंगी

इस कानून की संवैधानिकता को न्यायालय में चुनौती दी जायेगी और आम आदमी पार्टी तथा दिल्ली की निर्वाचित केजरीवाल सरकार अपने अधिकारों में कटौती के इन प्रयासों के खिलाफ हर तरह की मोर्चांबंदी करेगी.

सिस्टम से खिलवाड़ न करें, Covid की दूसरी लहर में लोगों की ख़ुशी के लिए कौटिल्य के लक्ष्य पर लौटें

सिस्टम के बहुत से हिस्सों को दोषी ठहराया जाएगा. केंद्र राज्यों पर दोष मढ़ेगा और तमाम सरकारें निजी क्षेत्र और लोगों की अनुशासनहीनता को ज़िम्मेदार ठहराएंगी.

‘3 इडियट्स’ का नैरेटिव अब BJP की मदद क्यों नहीं कर रहा

कोविड की इस ताज़ा चुनौती का पैमाना इतना बड़ा है कि उसे बहस की कला और कुतर्क से संभाला नहीं जा सकता.

कोरोना : ‘Restore Earth’ की नकली कोशिशें हमें यह समझने नहीं देती कि ऑक्सीजन लेवल क्या होता है

प्रकृति के साथ की जा रही इस मनमानी डील की सीटूसी कभी तो निकालनी पड़ेगी, हम नहीं तो हमारे आसपास खेल रहे बच्चों को यह कीमत चुकानी ही पड़ेगी.

पंचायती राज संस्थाओं में 77% महिलाएं मानती हैं कि वो ज़मीनी स्तर पर आसानी से बदलाव नहीं ला सकतीं

भारत में जमीनी स्तर पर राजनीति बदल रही है और ये पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की बदौलत हो रहा है.

‘वायरस वोट नहीं करता’- जब मोदी सरकार कोविड संकट से जूझ रही है तब BJP ने कड़ा सच सीखा

कुछ ऐसी चीजें हैं जो सशक्त नेता कभी नहीं करते हैं, जैसे यह स्वीकारना कि उनकी तरफ से कोई चूक हुई है. तीन हालिया उदाहरण बताते हैं कि सात साल में पहली बार नरेंद्र मोदी की नजरें नीची हुई हैं.

भारत ने लद्दाख में चीन के साथ ‘स्टैंड अलोन’ समझौते का विकल्प क्यों चुना

मेरा आकलन है कि चीन ने डीबीओ और गोगरा हॉट स्प्रिंग्स सेक्टर में प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष हमला करने की धमकी दे दी थी.

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अवामी लीग को तुरंत नए नेतृत्व की ज़रूरत, लेकिन वह इसे गलत जगहों पर ढूंढ रही है

अवामी लीग को अभी इस सवाल का जवाब नहीं चाहिए कि हसीना के बाद कौन होगा या यह बहस कि हसीना को बांग्लादेश लौटना चाहिए या नहीं, बल्कि ज़मीन पर नया नेतृत्व चाहिए.

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वर्ष 2035 तक 97,000 मेगावाट ताप बिजली क्षमता जोड़ने की योजना : सरकार

नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) राज्यसभा में सोमवार ने कहा कि सरकार ने कहा कि वर्ष 2034–35 तक अनुमानित 3,07,000 मेगावाट की ज़रूरत...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.