परदे के पीछे चलने वाले संवादों से तनाव कुछ कम हुआ तो दिखता है लेकिन नीति बनाने वालों की अपेक्षाओं और नीति तय करने की कठोर हकीकतों के बीच बड़ी खाई बनी हुई है.
आर्थिक सुधारों को अब जिस तरह ताबड़तोड़ लागू किया जा रहा है उससे यही संकेत मिल रहा है कि वे आर्थिक ‘रिकवरी’ की कोशिश तो करेंगे मगर अब तक जो कारगर साबित होता रहा है उससे तौबा नहीं करेंगे.
HAL इंजीनियरों को विदेशों में और IITs तथा IIMs जैसे प्रमुख संस्थानों में प्रशिक्षण देने पर भारी निवेश करता है, लेकिन उनका पूरा और सही उपयोग नहीं हो पाता.