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Thursday, 15 January, 2026
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आखिर क्यों हर बार न्यायपालिका को हस्तक्षेप कर कार्यपालिका को नींद से जगाना पड़ता है

न्यायपालिका का चाबुक चले बगैर कार्यपालिका और नौकरशाही गंभीर समस्याओं के मामले में भी सक्रिय नहीं होती है और इस वजह से निरीह जनता को तमाम परेशानियों से रूबरू होना पड़ता है.

सेंट्रल विस्टा में सुधार की जरूरत है, वो 7 गैर-कोविड कारण जहां मोदी सरकार ने गलती की

सवाल यह है कि इतनी महत्वपूर्ण, विशाल पैमाने वाली परियोजना को, जो गोपनीयता के पर्दे में छिपी है और जिसे जनता की नज़रों से दूर रखा गया है उसे क्या महामारी के बीच लागू किया जाना चाहिए जबकि एक-एक रुपया देश की मेडिकल सुविधाओं को बेहतर बनाने पर खर्च किया जाना चाहिए?

जीवनदायिनी नदियों से लेकर पूरा विंध्य क्षेत्र इस बात का सबूत है कि कैसी राजनीति घातक है और कौन सी असरदार

उत्तर प्रदेश और बिहार में कोविड त्रासदी की मूल वजह राजनीति व अर्थनीति में छिपी है. राजनीतिक सत्ता, और आर्थिक व सामाजिक संकेतकों के मामलों में जो क्षेत्रीय असंतुलन है वह गंभीर संकट का कारण है.

गंगा में बहती लाशें एक बड़े रंगमंच का हिस्सा हैं, जहां हर कोई अपने तय डायलॉग बोल रहा है

रंगमंच सजा हुआ है, किनारे पर कुछ विदुषक भी खड़े हैं, आईटी सेल ने उन्हे स्क्रिप्ट थमा दी है जिस पर लिखा है- सरकार को कोसने से क्या होगा जब समाज ही भ्रष्ट है, जो अपने सगे को गंगा में फेंक रहा है.

गंगा नदी भारत का इम्युनिटी बूस्टर हुआ करती थी, हम उसे सेल्फी प्वाइंट बनाकर तस्वीरें खींच रहे हैं

उत्तराखंड में गंगा किनारे आकार ले रहे ऑल वेदर रोड पर कई जगह सेल्फी प्वाइंट बनाए गए हैं. ताकि गंगा पर पर्यटन बढ़ाया जा सके. तीर्थाटन से पर्यटन की ओर जाती नीतियां गंगा के हर प्रमुख स्थल पर नजर आती है.

मौतों की तादाद को छिपाना बेकार है, कोविड के कहर से यूपी के गांवों को बचाना राष्ट्रीय मिशन होना चाहिए

यूपी के ग्रामीण अंचलों में कोविड कैसा कहर बरपा रहा है, इसका अनुमान सरकारी आंकड़ों से नहीं लगाया जा सकता.

भाजपा ने अब पूरी तरह से कांग्रेसी संस्कृति को अपना लिया है, असम इसका ताजा उदाहरण है

आलाकमान वाली संस्कृति और शीर्ष नेतृत्व के पूर्वाग्रहों ने हिमंता बिस्वा सरमा को 2015 में कांग्रेस से अलग होने पर मजबूर किया था. विडंबना यह है कि अब भाजपा में इसी संस्कृति ने उन्हें असम की ऊंची गद्दी पर बैठा दिया है.

नहीं, भारत में कोविड की रिपोर्टिंग को लेकर पश्चिमी मीडिया पक्षपातपूर्ण नहीं है. ये हैं कारण

अगर कोविड हमारे समय की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदि है, तो पत्रकारों को उसे दिखाना होगा, बताना होगा, लिखना होगा. पत्रकारिता में कोई राष्ट्रवाद शामिल नहीं होता.

सात चीजें, जो कोविड की तीसरी लहर आने के पहले मोदी सरकार को करनी चाहिए, यही है सही समय

मोदी सरकार को, जो लापता जैसी लगती है और जिसकी आवाज़ केवल सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्टों में ही सुनाई देती है, व्यवस्था को अपने नियंत्रण में लेकर ऐसे कदम उठाने चाहिए कि कोविड की तीसरी लहर के रूप में आशंकित जो बड़ी त्रासदी देश को दहशत में डाले हुए है उसे रोका जा सके

पोलियो, कुष्ठ रोग की लड़ाई में वैज्ञानिक डेटा भारत की ताकत थी. कोविड में, यह एक साइलेंट विक्टिम है

पहली लहर के बाद, वैज्ञानिक विशेषज्ञ हाशिये पर चले गए. जनवरी में, कोविड टास्क फोर्स ने मीटिंग तक बंद कर दिया था.

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‘नोटा’ परोक्ष रूप से अवांछित उम्मीदवारों को बढ़ावा देता है: निकाय चुनाव में मतदान के बाद बोले भागवत

नागपुर, 15 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने बृहस्पतिवार को नागपुर महानगरपालिका (एनएमसी) चुनाव में अपना वोट डाला और...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.