नई रिपोर्ट से पता चलता है कि पहली लहर में 23 करोड़ भारतीय गरीबी के भंवर में पड़े, बड़ी तादाद में महिलाओं ने स्थायी किस्म की नौकरी गंवायी और लगभग 17 प्रतिशत वेतनभोगी कामगार स्वास्थ्य क्षेत्र की नौकरी से निकलने को मजबूर हुए.
आलोचना, सवाल-जवाब किसी भी जीवंत लोकतंत्र की सबसे जरूरी शर्तें हैं, खास तौर से तब तो और भी जब वह ऐसे संकट से गुजर रहा हो जिसका उसने पहले कभी सामना न किया हो
तेजी से बढ़ते मामलों के बीच भारत के पड़ोसी देशों ने कोविड टीकाकरण पर अपने लोगों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए पूर्व की ओर—चीन की तरफ—देखना शुरू कर दिया है.
मेजर जनरल वासु वर्धन के तबादले पर, रक्षा मंत्रालय और सेना की प्रतिक्रिया, सभी के लिए एक संकेत है कि अगर वो नहीं झुकते, तो उन्हें क्या क़ीमत चुकानी पड़ सकती है, भले ही उनका रुख़ वर्दी के सबसे ऊंचे और क़ीमती मूल्य- नैतिक ईमानदारी की मर्यादा को बनाए रखता हो.
यह कहना है कि महामारी एक ‘अनदेखे दुश्मन’ का काम है, जिसके खिलाफ सरकार दुर्भाग्यवश ज्यादा कुछ नहीं कर पा रही है, कुछ और नहीं ये स्वीकारना ही है कि सरकार विफल रही है.
हालात की सकारात्मक तस्वीर पेश करने वाली अपनी ही कहानी पर यकीन कर रहे भाजपा नेताओं के विपरीत, अपने कई कार्यकर्ताओं को कोविड महामारी में गंवा चुका आरएसएस जो जमीनी हकीकत सामने ला रहा है वह कहीं ज्यादा सकते में डालने वाली है .
HAL इंजीनियरों को विदेशों में और IITs तथा IIMs जैसे प्रमुख संस्थानों में प्रशिक्षण देने पर भारी निवेश करता है, लेकिन उनका पूरा और सही उपयोग नहीं हो पाता.