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Thursday, 15 January, 2026
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महामारी के बीच सेना के शीर्ष डॉक्टर को हटाना सही नहीं, क्यों DGAFMS को सशस्त्र बलों के अधीन होना चाहिए

डीएमए और सीडीएस के गठन के साथ सशस्त्र बल सेवा महानिदेशालय को तुरंत ही सशस्त्र बलों के आधीन कर देना चाहिए.

पाकिस्तानी सांसद इजरायल पर ‘न्यूक्लियर हमला’, जिहाद का ऐलान चाहते हैं, जैसे यही एक सही तरीका हो

यदि आप फिलिस्तीन के प्रति समर्थन दिखाना चाहते हैं, तो हिटलर को कोट करना कोई उपाय नहीं है. पाकिस्तान में कुछ लोग समझते तक नहीं हैं.

समय तेजी से निकलता जा रहा है, कोविड से लड़ने के लिए सेना को गांवों में भेजा जाना चाहिए

सेना का हर अफसर, चाहे वह कमीशंड हो या नॉन-कमीशंड, संकट से निपटने के लिए प्रशिक्षित होता है.

नरेंद्र मोदी के लिए चुनौती न बन जाए ममता क्या इसलिए BJP उन्हें बंगाल में उलझाये रखना चाहती है

भाजपा और टीएमसी की महत्वाकांक्षाओं के आईने में देखकर कोई भी इनकार नहीं कर सकता कि उनके टकरावों से आगे न सिर्फ बंगाल बल्कि देश भी पीड़ित होगा.

भारत में कोविड-19 की पहली लहर के 5 सबक जो दूसरी लहर में लोगों की आजीविका बचा सकते हैं

नई रिपोर्ट से पता चलता है कि पहली लहर में 23 करोड़ भारतीय गरीबी के भंवर में पड़े, बड़ी तादाद में महिलाओं ने स्थायी किस्म की नौकरी गंवायी और लगभग 17 प्रतिशत वेतनभोगी कामगार स्वास्थ्य क्षेत्र की नौकरी से निकलने को मजबूर हुए.

मोदी सरकार के लिए लोगों का स्वास्थ्य नहीं, बल्कि खबरों की हेडलाइन मैनेजमेंट ज्यादा महत्त्वपूर्ण

आलोचना, सवाल-जवाब किसी भी जीवंत लोकतंत्र की सबसे जरूरी शर्तें हैं, खास तौर से तब तो और भी जब वह ऐसे संकट से गुजर रहा हो जिसका उसने पहले कभी सामना न किया हो

मालदीव में उथल-पुथल से हिंद महासागर में भारत के हित दांव पर, क्यों मोदी को आगे आना चाहिए

तेजी से बढ़ते मामलों के बीच भारत के पड़ोसी देशों ने कोविड टीकाकरण पर अपने लोगों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए पूर्व की ओर—चीन की तरफ—देखना शुरू कर दिया है.

महामारी के बीच में सेना के एक डॉक्टर का तबादला, भारत के सिविल-सैन्य रिश्तों के बारे में बहुत कुछ कहता है

मेजर जनरल वासु वर्धन के तबादले पर, रक्षा मंत्रालय और सेना की प्रतिक्रिया, सभी के लिए एक संकेत है कि अगर वो नहीं झुकते, तो उन्हें क्या क़ीमत चुकानी पड़ सकती है, भले ही उनका रुख़ वर्दी के सबसे ऊंचे और क़ीमती मूल्य- नैतिक ईमानदारी की मर्यादा को बनाए रखता हो.

मोदी को अब और स्वीकार करना क्रूरता को स्वीकार करना है

यह कहना है कि महामारी एक ‘अनदेखे दुश्मन’ का काम है, जिसके खिलाफ सरकार दुर्भाग्यवश ज्यादा कुछ नहीं कर पा रही है, कुछ और नहीं ये स्वीकारना ही है कि सरकार विफल रही है.

RSS को क्लीन चिट नहीं- अपनी पीठ खुद ठोक रहे भाजपा नेताओं को भागवत का भाषण फिर से सुनना चाहिए

हालात की सकारात्मक तस्वीर पेश करने वाली अपनी ही कहानी पर यकीन कर रहे भाजपा नेताओं के विपरीत, अपने कई कार्यकर्ताओं को कोविड महामारी में गंवा चुका आरएसएस जो जमीनी हकीकत सामने ला रहा है वह कहीं ज्यादा सकते में डालने वाली है .

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उत्तर प्रदेश: पत्नी और बेटी पर धारदार हथियार से हमला कर भागा सिपाही, बेटी की मौत

बांदा (उप्र), 15 जनवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में पीआरवी पुलिस वाहन के जीप चालक सिपाही ने घरेलू विवाद के चलते बुधवार...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.