भारत में अभी भी दस्तावेज़ और डिजिटल सिस्टम तक पहुंच बराबर नहीं है. चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया किसी डराने या नुकसान पहुंचाने वाली कार्रवाई में नहीं बदलनी चाहिए.
चौदह मिलियन शरणार्थी, तथा 25 मिलियन लोग तीव्र भूखमरी का सामना कर रहे हैं, यह दुनिया के लिए सूडान में व्याप्त अराजकता को समाप्त करने के लिए पर्याप्त कारण होना चाहिए - भले ही इसके शासकों की क्रूरता पर्याप्त कारण न हो.
कई अन्य भारतीय मूल के नेताओं के उलट, उन्होंने ईसाई धर्म नहीं अपनाया और न ही अपनी भारतीय पहचान को कम दिखाया. वैसे भी उनके लिए ऐसा करना मुश्किल होता क्योंकि उनकी मां मीरा नायर भारत की जानी-मानी फिल्म निर्देशक हैं.
कई ‘स्वतंत्र’ बताई जाने वाली रिपोर्टें, जिनका मकसद नीतियों को दिशा देना होता है, असल में बड़े उद्योग समूहों या पैसे वाले हितधारकों द्वारा कराई जाती हैं. इस प्रक्रिया में पारदर्शिता ज़रूरी है.
कर्नाटक की पीरियड लीव पॉलिसी तारीफ के काबिल है, लेकिन यही देश है जहां किसी भी वक्त मासिक धर्म वाली महिलाओं को बेइज़्ज़त और अपमानित किया जा सकता है — बिना किसी झिझक के.
पाकिस्तान अफगानों की उग्र स्वतंत्र मानसिकता और पख्तून राष्ट्रवाद की दृढ़ता को समझने में नाकाम रहा. यह राष्ट्रवाद 1747 में अफगानिस्तान की स्थापना के साथ ही उसकी सियासत पर हावी रहा है.
दुर्रानी को एनएसए बनाकर पाकिस्तान ने बड़ी छलांग लगाई थी, लेकिन हैरानी नहीं कि वे एक साल भी इस पद पर नहीं रह पाए. 26/11 कांड को पाकिस्तानी फौज/आईएसआई की धोखाधड़ी मानते हुए परेशान होकर उन्होंने किनारा कर लिया.
पाकिस्तान ने जातीय राष्ट्रवाद को ख़त्म करने की उम्मीद में अफ़ग़ानिस्तान में इस्लामवादियों के लिए धन में भारी वृद्धि की. अब उसकी यह रणनीति बुरी तरह उलटी पड़ गई है.