संसद के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन लोकसभा में बाल विवाह निषेध संशोधन विधेयक पेश किये जाना सरकार का लैंगिक समानता प्रदान करने की तुलना में राजनीतिक हित साधने वाला ज्यादा लगता है.
15वें वित्त आयोग ने भी यह प्रस्तावित किया है कि इस कैडर को आईएएस की तर्ज पर ही गठित किया जाए. पुनः मार्च 2021 में स्वास्थ्य मामलों की एक संसदीय समिति द्वारा भी सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए इस तरह की सेवा के विकास की वकालत की गई थी.
वाजपेयी में कई खामियां थीं, वे कई तरह से कमजोर थे और स्वार्थपूर्ण राजनीति करते थे लेकिन बहुरंगी समूहों को साथ लेकर चलने की कोशिश करने से वे कभी पीछे नहीं हटते थे.
देश का नाम भारत है तो इंडिया भी, राष्ट्रगान जन-गण-मन है तो वंदे मातरम् भी और सारे जहां से अच्छा की धुन भारतीय सेना बीटिंग रिट्रीट में बजाते आयी है, देश के झंडे में एक से ज्यादा रंग हैं और ठीक इसी तरह इस देश के कैलेंडर भी एक से ज्यादा हैं.
इन दोनों दृष्टिकोणों के द्वंद्व के बीच वे विभिन्न धर्म तो अपनी तरह से अपनी भूमिका निभाते ही हैं, जो सारे के सारे इस अर्थ में स्त्री के विरुद्ध हैं कि किसी भी धर्म का ईश्वर स्त्री नहीं है, बाजार भी कुछ कम भूमिका नहीं निभाता.
2021 से छुटकारा पाकर हम खुश भले हो रहे हों मगर यह न भूलें कि उसमें खेलों से लेकर उद्यमिता तक और कल्याणकारी योजनाओं से लेकर इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास तक कई सकारात्मक बातें भी हुईं.
दिल के दौरों और गैर-संचारी रोगों की रोकथाम के लिए व्यक्ति के हिसाब से भाोजन और पौष्टिकता संबंधी जागरूकता के साथ व्यापक राष्ट्रीय पौष्टिकता रणनीति की दरकार.
जाटव मतदाताओं का बड़ा समूह तो अभी भी मायावती की बीएसपी के पक्ष में दिख रहा है लेकिन दलितों के छोटे-छोटे समुदायों को अगर मिला दिया जाए तो वह एक बड़ा वोट बैंक बन जाता है
पाकिस्तान अधिकतर मामलों में भारत की बराबरी करे यह न केवल नामुमकिन है, बल्कि वह और पिछड़ता ही जाएगा. उसके नेता अपनी अवाम को अलग-अलग बोतल में सांप का तेल पेश करते रहेंगे.