कारगिल युद्ध खत्म होने के बाद, पहली बार साल 2000 में मंत्रियों के एक समूह ने ‘समुद्री मामलों के प्रबंधन के लिए एक शीर्ष निकाय’ के गठन का सुझाव दिया था.’
यह समझने की जरूरत है कि जो लोकलुभावन घोषणाएं जिस जनता के लिए की जाती हैं वह पैसा राजनीतिक दलों द्वारा स्वयं अर्जित नहीं बल्कि करदाताओं का पैसा होता है जिसका परोक्ष भार कर के रुप में फिर से उनके ऊपर ही आता है.