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Thursday, 5 March, 2026
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गुजरात कोई दिल्ली नहीं है, वहां मुक़ाबला ‘विकास’ के दावों से बढ़कर मोदी की जोरदार छवि से है

गुजरात के राजनीतिक शब्दकोश में ‘विकास’ को फिर से दाखिला मिल गया है लेकिन अरविंद केजरीवाल को समझना होगा कि वहां के मतदाता विकास के उनके ‘दिल्ली मॉडल’ को शायद ही पसंद करें.

परिसीमन दिखाता है कि कश्मीर चुनौती के सामने भारतीय लोकतंत्र कैसे संघर्ष कर रहा है

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के लिए परिसीमन आयोग ने जिस तरह से चुनावी क्षेत्रों की मैपिंग की है, उसने डोगरा शासनकाल के सांप्रदायिक घावों को फिर से हरा कर दिया है.

क्या हनुमान चालीसा का पाठ करना राजद्रोह की श्रेणी में आएगा

अटॉर्नी जनरल ने ही राजद्रोह कानून से संबंधित धारा 124 ए की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ करने पर राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तारी का उल्लेख किया.

औपनिवेशिक संस्कृति की गुलामी से उबरने के लिए ‘हिंदुत्व’ नहीं, देशज भाषा और दृष्टि जरूरी

क्या हम अब भी गुलाम हैं? साल जब हौले-हौले आजादी की 75वीं वर्षगांठ की तरफ कदम बढ़ा रहा है तो हमें अपने से यह सवाल जरूर पूछना चाहिए कि : क्या विचारों के मामले में हमने अपना स्वराज हासिल किया है?

देश में उभर रहा है नया ‘राजनीतिक विकल्प’ और यह सिर्फ BJP के लिए ही बुरी खबर नहीं है

भाजपा की पुरानी प्रतिद्वंद्वी देशभर में कमजोर होती जा रही है और उसकी जगह नयी, ज्यादा मुखर, ज्यादा लोकलुभावन और ज्यादा आक्रामक विपक्ष उभर रहा है.

बढ़ती महंगाई के बावजूद बहुत पहले क्यों नहीं बढ़ाई RBI ने प्रमुख ब्याज दरें? यह है वजह

आरबीआई की गलती खुदरा मुद्रास्फीति की दर 2% की छूट के साथ 4% पर रखने के अपने मैंडेट की व्याख्या से जुडी हो सकती है, क्योंकि यह मुद्रा स्फीति के 6% या उसके आस पास होने पर भी इसे कुछ भी न करने की अनुमति देती है.

भाजपा, AAP से लेकर प्रशांत किशोर तक: राजनीतिक सफर शुरू करने के लिए गांधी क्यों जरूरी

क्या महात्मा गांधी की राह पर चलना प्रशांत किशोर के लिए आसान होगा? क्या वैसा नैतिक बल और प्रतिबद्धता उनके अंदर है?

मुश्किल में भारत के ‘ऑफसेट’ रक्षा करार, सुधार की ज़रूरत है

अब तक जिन 57 ‘ऑफसेट’ करारों पर दस्तखत किए गए हैं उनमें जुर्माना ही भरना पड़ा है और इसमें और बढ़ोतरी होनी की ही उम्मीद है

‘इंडिया, आई लव यू’—लेकिन इस समय क्यों इमरान खान? कश्मीर से लेकर कोविड तक भारत एक अच्छी ढाल था

मोदीफोबिया से उबरने से लेकर ‘आजाद’ भारत की विदेश नीति की सराहना और भारतीयों को ‘स्वाभिमानी’ बताने तक, इमरान खान के यू-टर्न कुछ और नहीं उनके दोहरे चरित्र को दर्शाते हैं.

अगर भाजपा क्षेत्रीय पार्टी बनना चाहती है तो फिर वो देश में हिंदी को जरूर थोपे

भाजपा इस पुराने पड़ चुके भाषा विवाद को शायद ही फिर से भड़काना चाहेगी, आखिर अटल बिहारी वाजपेयी तक ने इसे खारिज कर दिया था.

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पेयजल त्रासदी: अदालत ने जांच आयोग को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए महीने भर की मोहलत दी

इंदौर, पांच मार्च (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने इंदौर में दूषित पेयजल से कई लोगों की मौत होने के मामले की जांच कर...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.