गुजरात के राजनीतिक शब्दकोश में ‘विकास’ को फिर से दाखिला मिल गया है लेकिन अरविंद केजरीवाल को समझना होगा कि वहां के मतदाता विकास के उनके ‘दिल्ली मॉडल’ को शायद ही पसंद करें.
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के लिए परिसीमन आयोग ने जिस तरह से चुनावी क्षेत्रों की मैपिंग की है, उसने डोगरा शासनकाल के सांप्रदायिक घावों को फिर से हरा कर दिया है.
अटॉर्नी जनरल ने ही राजद्रोह कानून से संबंधित धारा 124 ए की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ करने पर राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तारी का उल्लेख किया.
क्या हम अब भी गुलाम हैं? साल जब हौले-हौले आजादी की 75वीं वर्षगांठ की तरफ कदम बढ़ा रहा है तो हमें अपने से यह सवाल जरूर पूछना चाहिए कि : क्या विचारों के मामले में हमने अपना स्वराज हासिल किया है?
आरबीआई की गलती खुदरा मुद्रास्फीति की दर 2% की छूट के साथ 4% पर रखने के अपने मैंडेट की व्याख्या से जुडी हो सकती है, क्योंकि यह मुद्रा स्फीति के 6% या उसके आस पास होने पर भी इसे कुछ भी न करने की अनुमति देती है.
मोदीफोबिया से उबरने से लेकर ‘आजाद’ भारत की विदेश नीति की सराहना और भारतीयों को ‘स्वाभिमानी’ बताने तक, इमरान खान के यू-टर्न कुछ और नहीं उनके दोहरे चरित्र को दर्शाते हैं.
जेडी (यू) के पास अभी भी लोकसभा में 12 और राज्य विधानसभा में 85 सदस्य हो सकते हैं, लेकिन नीतीश कुमार के बिना पार्टी के सामने नेतृत्व की बड़ी कमी खड़ी हो गई है.