श्रीलंका के मौजूदा संकट से तो यही साफ होता है कि लंबे समय तक चले भाषायी विवाद से जो देश में स्थिति उत्पन्न हुई उससे बाद के सालों में कोई सबक नहीं लिया गया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचकों की चिंताएं जायज हैं लेकिन खौफज़दा होने की जरूरत नहीं है. मोदी के नाम पर ध्रुवीकरण की जो वजहें टीवी चैनलों और अखबारों में बताई जाती हैं वे गलत हैं.
आप तेजिंदर सिंह बग्गा जैसों से कैसे निपटेंगे ? अच्छा यही है कि उसकी अनदेखी की जाये. ऐसे किरदारों को नकारने के जुगत कीजिए प्रतिकार कीजिए और आपका यह नकार ही उनके लिए जीवनदायिनी शक्ति बन जायेगा.
पड़ोसी देश म्यांमार में नार्कोटिक्स के धंधे के ‘दादाओं’ ने राज्यतंत्र पर कब्जा कर लिया है. चीन वहां अपने पैर पसार रहा है और भारत के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं.
यदि इस देश को धार्मिक कट्टरता से छुटकारा पाना है और भारतीय जनमानस के सामाजिक समरसता एवं सामंजस्य को बचाना है तो सभी धर्मों में व्याप्त जातिवाद को समाप्त करते हुए सामाजिक न्याय को पूरी तरह स्थापित करना ही एक मात्र विकल्प दिखाई दे रहा है.
एक प्रेस कांफ्रेंस में तो यहां तक कह दिया कि अयोध्यावासियों को खून के आंसू रुलाने पर आमादा योगी सरकार इतना भी नहीं समझती कि भगवान राम की प्रजा को बेघरबार कर उसके हाथों में कटोरा देकर रामकाज करने का उसका दावा कितना अमानवीय है.
जेडी (यू) के पास अभी भी लोकसभा में 12 और राज्य विधानसभा में 85 सदस्य हो सकते हैं, लेकिन नीतीश कुमार के बिना पार्टी के सामने नेतृत्व की बड़ी कमी खड़ी हो गई है.