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Saturday, 28 March, 2026
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मत-विमत

पर्यावरण को लेकर लोगों में लगातार बढ़ रही उदासीनता, भुगतने पड़ेंगे बुरे नतीजे

ये बहुत दुखद है कि जिस देश में पेड़ों को बचाने के लिए चिपको जैसा महान आंदोलन चला हो, जिस देश में प्रकृति को पूजा जाता हो वहां के लोग अब पर्यावरण को लेकर बहुत उदासीन हो चुके हैं.

ये ‘बिश्नोई गैंग’ नहीं, लॉरेन्स गैंग है , जो बिश्नोई समाज को बदनाम कर रहा है

आवश्यकता इस बात की है कि बिश्नोई समाज आगे आकर अपनी प्रतिष्ठा हासिल करे और समाज में अपना योगदान दे. वरना उनके प्रतिनिधित्व के नाम पर आपराधिक तत्व ही छाए रहेंगे.

मोदी सरकार की कश्मीर नीति सफल रही, असफल रही या वही है जो पहले थी

मोदी सरकार की कश्मीर नीति राज्य का स्टेटस बदलने और इस बात का निर्धारण करने में सफल रही है कि किस पर बात होगी और किस पर नहीं लेकिन इससे आतंकवाद का खात्मा हो जाएगा यह खयाली पुलाव है.

जवाबदेही से बचने के लिए पिछली सरकारें औपचारिक रक्षा नीति बनाने से हिचकती रहीं

मोदी-शाह की टीम ने पुलवामा और उरी में सर्जिकल और हवाई हमले करके भारतीय रक्षा नीति का उदाहरण तो पेश किया मगर औपचारिक रक्षा नीति अभी भी नहीं बनी है.

इतिहास, मिथक या हिंदुत्व की विचारधारा, BJP और RSS को क्यों पसंद आई फिल्म सम्राट पृथ्वीराज

ये फिल्म दुश्मन को बड़ा दिखाने के चक्कर में गजनी शहर को रोम वाली भव्यता दे डालती है, जिसमें भव्य महल, हजारों की कैपिसिटी वाले विशाल स्टेडियम और शानदार इमारतें हैं. जबकि अपने सबसे अच्छे दिनों में भी ये एक मामूली सा शहर ही था.

पैसिफिक समंदर पार खालिस्तान: कैसे कनाडा में जन्मा गैंग्स ऑफ पंजाब

सिद्धू मूसेवाला की हत्या से अंतरदेशीय आपराधिक गिरोहों पर खौफनाक रोशनी पड़ी, जिसकी जहरीली हवा पंजाब के युवाओं में घर कर रही है.

उदारवादी तय करें, BJP के कारण समान नागरिक संहिता का विरोध करेंगे या धर्मनिरपेक्षता का समर्थन

डर यह है कि समान नागरिक संहिता के साथ संभवतः उभरने वाले हिंदू विजयोल्लास से खीज कर सेकुलर उदारवादी जमात धर्मनिरपेक्षता को भूल कर इस कदम का विरोध करने लगेगी.

लाल सिंह चड्ढा हॉलीवुड मूवी फॉरेस्ट गम्प की कमजोर रिमेक साबित होगी

लाल सिंह चड्ढा व्यक्ति फॉरेस्ट गम्प की कहानी को बेशक दोहरा लेगा लेकिन साथ में राष्ट्र और समाज की जो यात्रा चलती है उसे दिखा पाना आसान नहीं होगा.

यह ‘शिक्षाघात’ नहीं तो क्या है? कोरोनाबंदी के बाद पहला स्कूली सर्वेक्षण देश से यह सवाल पूछता है

यह सर्वेक्षण अपने विस्तार और गहराई में सचमुच प्रभावशाली है. इस सर्वेक्षण में तीसरी, पांचवी, आठवीं तथा दसवीं क्लास के विद्यार्थियों की तमाम बुनियादी विषयों की जानकारी जांच की जाती है.

भारतीय ड्राइवरों की तेजी से खराब हो रही हैं आंखें, बहुत से तो ठीक से देख तक नहीं पाते

भारत के ड्राइवरों की कमजोर आंख बड़ी समस्या है, 40 फीसदी को सही चश्मे चाहिए जबकि 5 फीसदी को तो फौरन मोतियाबिंद का इलाज कराने की दरकार.

मत-विमत

खाड़ी युद्ध ने भारत की कमजोरियां उजागर कीं, अब राष्ट्रीय हित में आत्ममंथन का वक्त है

सरकार कड़वा सच क्यों नहीं बोल सकती, इसे समझना बहुत आसान है. तमाम युद्धों की तरह यह युद्ध भी जब रुक जाएगा तब भी भारत के हित विजेता के साथ भी जुड़े होंगे और हारने वालों के साथ भी.

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आईपीएल टिकट विधायकों को देने का फैसला ‘वीआईपी संस्कृति’ : भाजपा नेता सुरेश कुमार

बेंगलुरु, 28 मार्च (भाषा) कर्नाटक से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक एस सुरेश कुमार ने प्रत्येक विधायक को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.