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Tuesday, 24 February, 2026
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क्या प्रशांत किशोर बिहार के केजरीवाल हैं? हां, लेकिन पूरी तरह नहीं

14 नवंबर को जो भी नतीजा आए, पीके बतौर नेता बिहार की राजनीति में अपनी जगह बना चुके हैं. वह अब चुनावी रणनीतिकार वाले पीके नहीं, एक अलग पीके हैं.

ममदानी की जीत से भी बड़ा संदेश है—मॉडरेट डेमोक्रेट्स का उभार. पार्टी फिर से मजबूती पकड़ रही है

न्यूयॉर्क अमेरिका का सबसे अंतरराष्ट्रीय शहर है, देश का असली दिल नहीं. इसलिए 4 नवंबर को अमेरिका के बाकी हिस्सों में क्या हुआ, यह देखना ज़रूरी है.

सऊदी अरब की तेल की ताकत घट रही है. इसका अमेरिका के साथ उसके रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा?

इसमें कोई संदेह नहीं कि सऊदी अरब ने अपनी समस्याओं को खुद बढ़ाया है, जिसका कारण नेतृत्व का अहंकार और खराब सलाह है. ‘दि लाइन’ इसका स्पष्ट उदाहरण है.

बिहार की विपक्षी पार्टियां प्रवासन को गलत नजरिए से देख रहे हैं

प्रवासियों और उनके परिवारों के एक बड़े वर्ग की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में बदलाव आ रहा है. इससे उन्हें समाज में सम्मानजनक दर्जा हासिल करने में मदद मिल रही है.

बिहार—जहां सिर्फ राजनीति ही आगे बढ़ी, बाकी सब कुछ ठहरा रह गया

बिहार के पास ऐसी उपजाऊ ज़मीन है जो पूरे भारत में सबसे ज्यादा क्रांतियों को जन्म देने वाली रही है. इसके बावजूद बिहार इतना पीछे क्यों रह गया? राजनीति का स्थायी जुनून ही उसके विनाश की मूल वजह है.

ममदानी और स्पैनबर्गर की जीत डेमोक्रेट्स में बढ़ती दरार को दर्शाती है

जैसे ही ट्रंप के नेतृत्व वाली रिपब्लिकन पार्टी अपनी हार का आकलन कर अगले साल के मिडटर्म चुनावों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, डेमोक्रेट्स की अंदरूनी समीक्षा का दौर शुरू होने वाला है.

SIR ड्राइव NRC-CAA नहीं है—यह सिर्फ मुस्लिम नहीं, बल्कि लाखों असली वोटर्स को भी सूची से बाहर कर सकती है

भारत में अभी भी दस्तावेज़ और डिजिटल सिस्टम तक पहुंच बराबर नहीं है. चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया किसी डराने या नुकसान पहुंचाने वाली कार्रवाई में नहीं बदलनी चाहिए.

सूडान साबित करता है कि जब दुनिया ख़ूनी शासकों पर लगाम नहीं लगाती, तो नतीजे कितने भयानक होते हैं

चौदह मिलियन शरणार्थी, तथा 25 मिलियन लोग तीव्र भूखमरी का सामना कर रहे हैं, यह दुनिया के लिए सूडान में व्याप्त अराजकता को समाप्त करने के लिए पर्याप्त कारण होना चाहिए - भले ही इसके शासकों की क्रूरता पर्याप्त कारण न हो.

ज़ोहरान ममदानी आधुनिक भारत की असली पहचान हैं

कई अन्य भारतीय मूल के नेताओं के उलट, उन्होंने ईसाई धर्म नहीं अपनाया और न ही अपनी भारतीय पहचान को कम दिखाया. वैसे भी उनके लिए ऐसा करना मुश्किल होता क्योंकि उनकी मां मीरा नायर भारत की जानी-मानी फिल्म निर्देशक हैं.

भारत के थिंक टैंक लॉबिस्ट की तरह है खुलासा नहीं करते, इससे पॉलिसी खराब होती है

कई ‘स्वतंत्र’ बताई जाने वाली रिपोर्टें, जिनका मकसद नीतियों को दिशा देना होता है, असल में बड़े उद्योग समूहों या पैसे वाले हितधारकों द्वारा कराई जाती हैं. इस प्रक्रिया में पारदर्शिता ज़रूरी है.

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एक वायरल बंदर, एक IKEA का प्लश टॉय और US सुप्रीम कोर्ट का फैसला: टैरिफ के बारे में क्या बताते हैं

पंच का अपने प्लश टॉय से लगाव उसके देश से नहीं, बल्कि उससे मिलने वाले आराम से है. इसी तरह, ग्राहक जियोपॉलिटिकल लेबल से ज्यादा भरोसे और डिजाइन को प्राथमिकता देते हैं.

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सेवा तीर्थ शक्ति के प्रदर्शन का नहीं, बल्कि सशक्तीकरण का केंद्र होगा : मंत्रिमंडल का प्रस्ताव

नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को नये प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) परिसर में अपनी पहली बैठक में यह संकल्प लिया...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.