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Tuesday, 24 March, 2026
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PM मोदी तेलंगाना BJP नेताओं से इतने नाराज़ क्यों हैं?

मोदी की एक टिप्पणी से साफ पता चलता है कि उनके मन में क्या चल रहा था. '1984 में हमने दो सीटें जीती थीं. हम गुजरात में कहां हैं और तेलंगाना में कहां?'

खराब इन्फ्रास्ट्रक्चर और लापरवाह ड्राइवर भारत में सड़क दुर्घटनाओं की जड़ हैं. इन्हें कैसे सुधारा जाए

शायद अख़बार रोज़ाना होने वाले सड़क हादसों और मौतों की रिपोर्टिंग के लिए एक अलग कॉलम बना सकते हैं, जैसा कि कोविड-19 महामारी के दौरान मौतों के आंकड़ों की रिपोर्टिंग की जाती थी.

‘सत्य के प्रयोग’ के भीतर का गांधी: आत्मकथा, काम-भाव और व्यक्तित्व के अंतर्विरोध

1925 में प्रकाशित गांधी की आत्मकथा बचपन से सार्वजनिक जीवन तक की कथा कहती है, लेकिन स्त्री-संसर्ग, ब्रह्मचर्य और नैतिक संघर्षों पर उनके आत्मस्वीकार एक अलग, असहज गांधी को सामने लाते हैं.

कुछ भारतीय-अमेरिकी भारतीयों को ही निशाना बना रहे हैं — उन्हें लगता है इससे MAGA नाराज़ नहीं होगा

जो बात साफ दिखती है, वह वही है जो हम में से कई लोग पहले से जानते थे: डिग्रियां आपको नस्लवाद से नहीं बचा सकतीं और “मॉडल माइनॉरिटी” का टैग तो बिल्कुल भी नहीं.

भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन ने सरकार को कमान सौंप दी — यही इंडिगो की असली ‘गलती’ है

बदकिस्मती को दोष मत दीजिए. यह बड़ी नाकामी और लापरवाही है. हालात इतने खराब हैं कि पुराने पीएसयू दौर की इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया में भी इस पर बड़े अफसरों पर कार्रवाई हो जाती.

बांग्लादेश चुनाव और BNP के तारिक रहमान की वापसी—क्यों जमात-ए-इस्लामी दोनों के लिए अहम कड़ी है

बांग्लादेश में तारिक रहमान किससे इतना डरते हैं कि वह न तो अपनी बीमार मां से मिलने घर आ पा रहे हैं और न ही अहम चुनाव से पहले अपनी पार्टी की कमान संभाल पा रहे हैं?

एयरस्पेस सेक्टर में दिग्गज होना तो दूर, भारत असल में एक आयातक ही है

दशकों से भारतीय रक्षा उद्योग ‘देसी’ कलपुर्ज़े ही देता रहा है. इनमें से ज़्यादातर में बस आयातित पुर्जों की एसेंबलिंग की जाती है और आयात पर गहरी निर्भरता के ऊपर परदा डाल दिया जाता है.

भारत हमेशा ऐसा नहीं था, हालात आज जितने खराब हैं, पहले कभी नहीं रहे

क्या भारत की व्यवस्था हमेशा इतनी लापरवाह थी कि नेता लोगों को ज़हर खाए, फंसे हुए या ज़िंदा जलते देखते रहें और कुछ भी न हो?

चुनावी सुधार या सत्ता मजबूत करने की रणनीति? मोदी सरकार के फैसलों पर सवाल

चुनाव प्रक्रिया को लेकर मोदी सरकार का तरीका ‘सुधार नहीं, बिगाड़’ कहना ज्यादा ठीक है. ये कोई बढ़ा-चढ़ाकर कही बात नहीं है. रिकॉर्ड खुद देख लीजिए.

भारत की माओवादियों से लंबी जंग में एक ऐसा खालीपन है जिसे मौतों का आंकड़ा भी नहीं भर सकता है

कमज़ोर शासन, भ्रष्टाचार और गरीबी भारत में आदिवासी जीवन की पहचान बने हुए हैं. इंडस्ट्रियल और माइनिंग प्रोजेक्ट्स शुरू होने से आदिवासियों के मुकाबले ठेकेदारों, नेताओं और अधिकारियों को ज़्यादा फायदा हुआ है.

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दिल्ली के बवाना में लकड़ी के गोदाम में आग लगी

नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) दिल्ली के बवाना इलाके में लकड़ी के गोदाम में मंगलवार तड़के भीषण आग लग गई। दिल्ली दमकल सेवा (डीएफएस)...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.