बिहार के वोटर वंशवादी राजनीति, अल्पसंख्यक राजनीति या जाति की राजनीति नहीं चाहते—ये सब कांग्रेस पार्टी द्वारा चलाए गए पुराने, पिछड़े और बांटने वाले हथकंडे हैं.
ड्राफ्ट सीड्स बिल में बड़े आइडिया सही हैं — यूनिवर्सल रजिस्ट्रेशन, ट्रेसबिलिटी, असली पेनल्टी. पंजाब के लिए काम तभी बनेगा जब इसमें फेडरल सिस्टम और किसान-हित से जुड़े बारीक मुद्दे ठीक से तय हों.
मंडल राजनीति की सबसे बड़ी प्रतिनिधि रही RJD अब ऐसी राजनीतिक स्थिति में है, जहां लाभकारी योजनाएं, अच्छा शासन और नई उम्मीदें पुराने जातीय समीकरणों पर भारी पड़ रही हैं.
कांग्रेस के दोबारा मजबूत हुए बिना, बीजेपी को राष्ट्रीय स्तर पर चुनौती नहीं दी जा सकती. मोदी की पार्टी बढ़ रही है और वह भी लगभग पूरी तरह कांग्रेस की कीमत पर.
अगर महिलाओं को समान इज़्ज़त देने की मांग को ‘किसी समुदाय को निशाना बनाना’ कहा जाए, तो शायद हर समुदाय को तब तक ‘निशाना’ बनाया जाना चाहिए जब तक बराबरी सबके लिए न हो जाए.
गठबंधन पार्टियों का वोट शेयर कम नहीं हुआ है. इस चुनाव का मुख्य संदेश यही है कि आपका पक्का वोट बैंक कोई नहीं छीन सकता. “दूसरों” को जोड़ने के लिए आपको गठबंधन बनाना ही होगा.
पीढ़ियों से बिहार की सबसे बड़ी समस्या इसकी शहरीकरण की भारी कमी रही है, लेकिन अब, बिहार भी शहरी हो रहा है. या यूं कहें, ‘रर्बन’ हो रहा है. नीतीश कुमार के दो दशकों के शासन ने उसके शहरों में एक नया एलीट वर्ग खड़ा कर दिया है.
पंच का अपने प्लश टॉय से लगाव उसके देश से नहीं, बल्कि उससे मिलने वाले आराम से है. इसी तरह, ग्राहक जियोपॉलिटिकल लेबल से ज्यादा भरोसे और डिजाइन को प्राथमिकता देते हैं.