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Saturday, 31 January, 2026
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मत-विमत

भारतीय वामपंथ अतीत में फंसा हुआ है, नए संघर्ष की भाषा की ज़रूरत

मजबूत वाम विपक्ष की कमी लोकतांत्रिक जांच कमज़ोर करती है, संसद को राज्य–बाज़ार संबंधों पर समन्वित आलोचना से वंचित छोड़ देती है.

भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने लायक बिजली पैदा करता है, लेकिन अब दरकार नेट-ज़ीरो क्रांति की

अगर हर प्रोजेक्ट को मापने योग्य नेट-ज़ीरो मानकों पर परखा जाए, तो भारत दुनिया को दिखा सकता है कि किसी देश की तरक्की को धरती की तरक्की से अलग नहीं होना चाहिए.

तालिबान का स्वागत फायदे के लिए सही बताया जा रहा है, लेकिन इसमें कई नैतिक सवाल हैं

तालिबान जैसे शासन के लिए सम्मान और तालियां, जो अफगान महिलाओं को शिक्षा, आज़ादी और गरिमा के साथ जीने का अधिकार तक नहीं देता, सिहरन पैदा करने वाला था.

सुप्रीम कोर्ट का ग्रीन पटाखों को हरी झंडी देना दिल्ली की एजेंसियों के लिए सिरदर्द है

दिखने में ग्रीन पटाखों और आम पटाखों में कोई फर्क नहीं है. पुलिस या कोई भी एजेंसी फर्क नहीं बता पाएगी, जिससे नियम लागू करना मुश्किल हो जाएगा.

100 अरब डॉलर की नाकाम जंग, हमास अब भी टिका हुआ है—शांति समझौता बना बुरी मिसाल

एक और शांति समझौता हुआ, स्पष्ट नोबेल शांति पुरस्कार की मंशा के साथ और फिलिस्तीनियों के बिना.

देवबंद में मुत्ताकी की यात्रा तालिबान की पाकिस्तान के खिलाफ रणनीति को उजागर करती है

तालिबान गुट टीटीपी को एक वैचारिक सहयोगी के रूप में पोषित करते हैं, क्योंकि अमीर हिबतुल्लाह अखुंदजादा का शासन सीमावर्ती क्षेत्रों को पाकिस्तानी नहीं, बल्कि अफगानी मानता है.

BJP ने सोशल मीडिया को अपनी ताकत बनाया — अब वही मोदी सरकार के लिए मुसीबत बन गया है

ऐसा लगता है कि मोदी सरकार एक्स से खुद को अलग नहीं कर पा रही है. वह सोशल मीडिया पर बढ़ते गुस्से को बढ़ावा दे रही है और अपने ही बनाए राक्षस को चुपचाप और बड़ा कर रही है.

ट्रंप का अमेरिका लोकतंत्र से फिसल तो रहा है मगर दक्षिणपंथी क्रांति से दूर है

तमाम संगठन वक्त के साथ बदलते हैं, संघ ने भी शायद खुद को बदला है, लेकिन इसका अतीत इस पर राजनीतिक हमले करने के लिए इसके आलोचकों को आसानी से हथियार मुहैया कराता है.

पाकिस्तान ने विदेश नीति को बनाया चमचागिरी — महाशक्ति के आगे इसके नेता क्यों हैं नतमस्तक

नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और मोरारजी देसाई जैसे भारतीय नेताओं को पश्चिम ने अहंकारी माना, जबकि पाकिस्तानी नेता हमेशा घुटनों पर झुकने को तैयार रहते थे.

झूठे राजनेता और प्रतियोगी ‘रेवड़ी’ राजनीति में उनकी बढ़ती मुश्किलें

प्रधानमंत्री मोदी ने 'रेवड़ी' की राजनीति पर हमला बोलकर सही मायने में शुरुआत की. यही उनकी विरासत हो सकती थी. लेकिन उन्होंने पार्टी के फायदे के लिए विपक्ष को रेवड़ी बांटने में मात देना शुरू कर दिया.

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गुज़ारा करने के लिए कर्ज़ा: भारतीय परिवार ज़्यादा बचत करते हैं, फिर भी क्यों हैं कर्ज़ में?

आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि छह साल में पर्सनल लोन तीन गुना हो गए हैं और कर्ज़ चुकाने में चूक बढ़ी है; सोशल मीडिया से बनी लाइफस्टाइल को बनाए रखने के लिए मिडिल क्लास कर्ज़ ले रहा है, जबकि असली मज़दूरी आधी रह गई है.

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राजनीति

देश

सुनेत्रा के कैबिनेट में शामिल होने के निर्णय को लेकर राकांपा (एसपी) से परामर्श नहीं किया गया:सूत्र

पुणे, 30 जनवरी (भाषा) राज्यसभा सदस्य सुनेत्रा पवार शुक्रवार शाम पुणे से मुंबई के लिए रवाना हो गईं, जहां उनके शनिवार को अपने दिवंगत...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.