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Friday, 30 January, 2026
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मिशन त्रिशूल से मोहन भागवत की यात्राओं तक: बिहार में क्या खोज रहा है RSS?

मंडल की राजनीति ने पिछड़ों, दलितों और अति पिछड़ों की पहचान को राजनीतिक चेतना में बदल दिया है. ऐसे में, RSS का एकीकृत हिंदू समाज का विचार उस विविधता से टकराता है जो बिहार की राजनीति की आत्मा है.

BJP की एकरूपता वाली नीति ठीक नहीं है. लद्दाख दिखाता है कि संघवाद हमारी लोकतंत्र की असली नींव है

बीजेपी के बहुसंख्यकवादी और एकरूपता वाले एजेंडा, जैसे ‘वन नेशन, वन पीपल, वन कल्चर’, क्षेत्रीय पहचानों के लिए खतरा पैदा करते हैं.

गोवा में अब गुस्सा प्रवासियों की ओर मुड़ रहा है

असली नाराज़गी गोवा में दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु से आने वाले अमीर टूरिस्टों और ज़मीन खरीदने वालों पर है, लेकिन गुस्सा नीचे की ओर जाकर सबसे गरीब मेहनतकश लोगों पर निकल रहा है, जो उत्तर भारत के राज्यों से आते हैं.

वोट चोरी पर ECI का रिएक्शन सिर्फ ठंडा गुस्सा और कोई कार्रवाई नहीं, मीडिया भी यही कर रही है

विपक्षी पार्टियों ने अपने स्तर पर पूरी कोशिश की है, साफ-साफ सबूत भी इकट्ठा किए हैं, लेकिन सामने से सिर्फ चुप्पी और बचने की कोशिश हो रही है.

क्यों भारतीय और अमेरिकी हिंदुओं को एक प्रचार करने वाली दुनिया में खुद को बदलना होगा

भारत के विभिन्न संप्रदायों को अपनी परंपराओं और ज्ञान को संस्थागत रूप देना होगा और उसे इस तरह सरल बनाना होगा कि वह आसानी से आगे सिखाया जा सके और लोगों तक फैलाया जा सके, अगर उन्हें बड़े अब्राहमिक धर्मों के साथ प्रतिस्पर्धा करना है.

क्या प्रशांत किशोर बिहार के केजरीवाल हैं? हां, लेकिन पूरी तरह नहीं

14 नवंबर को जो भी नतीजा आए, पीके बतौर नेता बिहार की राजनीति में अपनी जगह बना चुके हैं. वह अब चुनावी रणनीतिकार वाले पीके नहीं, एक अलग पीके हैं.

ममदानी की जीत से भी बड़ा संदेश है—मॉडरेट डेमोक्रेट्स का उभार. पार्टी फिर से मजबूती पकड़ रही है

न्यूयॉर्क अमेरिका का सबसे अंतरराष्ट्रीय शहर है, देश का असली दिल नहीं. इसलिए 4 नवंबर को अमेरिका के बाकी हिस्सों में क्या हुआ, यह देखना ज़रूरी है.

सऊदी अरब की तेल की ताकत घट रही है. इसका अमेरिका के साथ उसके रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा?

इसमें कोई संदेह नहीं कि सऊदी अरब ने अपनी समस्याओं को खुद बढ़ाया है, जिसका कारण नेतृत्व का अहंकार और खराब सलाह है. ‘दि लाइन’ इसका स्पष्ट उदाहरण है.

बिहार की विपक्षी पार्टियां प्रवासन को गलत नजरिए से देख रहे हैं

प्रवासियों और उनके परिवारों के एक बड़े वर्ग की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में बदलाव आ रहा है. इससे उन्हें समाज में सम्मानजनक दर्जा हासिल करने में मदद मिल रही है.

बिहार—जहां सिर्फ राजनीति ही आगे बढ़ी, बाकी सब कुछ ठहरा रह गया

बिहार के पास ऐसी उपजाऊ ज़मीन है जो पूरे भारत में सबसे ज्यादा क्रांतियों को जन्म देने वाली रही है. इसके बावजूद बिहार इतना पीछे क्यों रह गया? राजनीति का स्थायी जुनून ही उसके विनाश की मूल वजह है.

मत-विमत

अजित पवार की मौत ने भारतीय राजनीति में एक और ‘क्या होता अगर’ वाली बहस छोड़ दी है

दीन दयाल उपाध्याय की हत्या और माधवराव सिंधिया के प्लेन क्रैश से लेकर गांधी परिवार की हत्याओं तक, राजनीति में जो कुछ भी होता है, उसका हिसाब-किताब से कम और किस्मत से ज़्यादा लेना-देना होता है.

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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं पूरी करने को कहा

अमरावती, 30 जनवरी (भाषा) आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को राज्य में जारी 1.40 लाख करोड़ रुपये की राष्ट्रीय राजमार्ग...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.