दीपक और अम्मा के काम मायने रखते हैं. एक ऐसे देश में जहां सामूहिक लापरवाही जीने की रणनीति बन गई है, वहां किसी को ‘ना’ कहते देखना एक बड़ा बदलाव जैसा लगता है.
मुझे लिखित संदेश मिला कि कानू सान्याल अपना ‘प्रतिनिधिमंडल’ मेरे पास भेजना चाहते हैं. उम्मीद की जा रही थी कि अपने उग्र समर्थकों के साथ आ रहे दुबले-पतले गुस्सैल बूढ़े आदमी के साथ बेहद तीखी मुठभेड़ होगी.