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Friday, 1 May, 2026
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बांग्लादेश, यूक्रेन, इज़रायल यही सिखाता है कि हर जंग का कोई ‘अंत’ तो होना ही चाहिए

अगर जंग से अपेक्षित नतीजे या उसके लक्ष्य अनिश्चित अथवा अस्पष्ट होंगे तो पूरी संभावना यही है कि वह एक अंतहीन या जीत न दिलाने वाली जंग में तब्दील हो जाएगी.

अमशीपोरा ‘मुठभेड़’ मामले में कोर्ट मार्शल का फैसला क्यों बदला? इसे टाला जा सकता था

2020 में मैंने चेतावनी दी थी कि कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से चलाई जाए ताकि वह एएफटी और सुप्रीम कोर्ट की वैधानिक जांच में टिक सके, लेकिन ऐसा नहीं किया गया.

भारतीय रेलवे केवल तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन सुपरफास्ट ट्रैक पर दौड़ने के लिए नया बिजनेस प्लान जरूरी

सड़क परिवहन से मुक़ाबले में पिछड़ रही रेलवे यात्री गाड़ियों से घाटा ही कमा रही है लेकिन भाड़ा न बढ़ाकर वह यात्रियों का कोई भला भी नहीं कर रही है.

अल जज़ीरा के बढ़ते पाखंड को नज़रअंदाज़ करना अब और भी कठिन होता जा रहा है

अल जज़ीरा चाहता है कि भारत पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक हो. लेकिन कतर के बारे में उसका क्या विचार है?

कर्नाटक का झटका- चुनावों में कोई बड़ा आइडिया नहीं, BJP ने कांग्रेस के ‘रेवड़ी’, जाति के मुद्दे को अपनाया

यह पहला मौका है जब भाजपा ने विपक्ष के जवाब में अपना आजमाया हुआ और कामयाब चुनावी सुर बदल दिया है. यह जाति, और कभी निंदित की गई “रेवड़ी संस्कृति” के मुद्दों पर उसके रुख से स्पष्ट है.

‘सरकार अच्छी, काम अच्छा, लेकिन..,’ क्या रोटी पलटने का सिलसिला राजस्थान में जारी रहेगा?

राजस्थान में इक्का-दुक्का शायद ही कोई मिलेगा जो अशोक गहलोत की बुराई करता हो. बीजेपी के परंपरागत वोटर भी आपको पहले यही बतायेंगे कि `काम तो किया है` और इसके बाद उसी सुर में ये भी जोड़ते मिलेंगे कि `लेकिन राज्य में सरकार तो पलटेगी`.

भारत-पाकिस्तान भी बन सकते हैं इज़रायल-हमास. सबक ये कि आतंकवाद को केवल ताकत से खत्म नहीं किया जा सकता

गेंद अब अमेरिका और अरब देशों के पालों में है. उनका संयुक्त दबाव गाज़ा में विध्वंस मचा रहे इजरायल को रोक सकता है.

कैसे पीएम मोदी ने राहुल गांधी की ‘जितनी आबादी, उतना हक’ राजनीति का समर्थन किया

माडिगाओं की शिकायत यह रही है कि माला, जिनकी संख्या उनसे कम है, एससी आरक्षण का बड़ा हिस्सा हथिया लिया है.

अपने लिंग को लेकर गोडसे की कन्फ्यूजन और गांधी कैसे बने एक सरोगेट पिता

कुछ लोग गोडसे का पुनर्वास करना चाहते हैं, उनकी छवि को हत्यारे से देशभक्त के रूप में पुनः स्थापित करना चाहते हैं. लेकिन द फादर एंड द असैसिन में नाटककार अनुपमा चंद्रशेखर उन्हें बचाना नहीं चाहतीं.

IIT के एलुमनाई पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं, लेकिन वे दर्शन सोलंकी, आशना आघात के प्रति उदासीन हैं

आईआईटी एलुमनाई का नेटवर्क अपने ब्राह्मण-केंद्रित दायरे को कब पार करेगा? ये प्रभावशाली आवाजें प्रचलित मानदंडों को कब चुनौती देंगी ताकि प्रत्येक छात्र बिना किसी पूर्वाग्रह के आगे बढ़ सके?

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अरविंद केजरीवाल को उस राजनीति की कीमत चुकानी पड़ रही है, जिसे उन्होंने खुद गढ़ा था

मोदी सरकार अरविंद केजरीवाल के साथ जो कर रही है, वह गलत है. लेकिन क्या मोदी सरकार कभी अस्तित्व में आती, अगर केजरीवाल और उनके 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' आंदोलन ने UPA को तबाह न किया होता?

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राजनीति

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धनवान देश 2048 तक सर्वाइल कैंसर को खत्म कर सकते हैं, जबकि निम्न आय वाले देशों में प्रगति धीमी: शोध

नयी दिल्ली, एक मई (भाषा) उच्च आय वाले देश 2048 तक ‘सर्वाइकल’ कैंसर को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं जबकि...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.