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Friday, 30 January, 2026
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बांग्लादेश चुनाव और BNP के तारिक रहमान की वापसी—क्यों जमात-ए-इस्लामी दोनों के लिए अहम कड़ी है

बांग्लादेश में तारिक रहमान किससे इतना डरते हैं कि वह न तो अपनी बीमार मां से मिलने घर आ पा रहे हैं और न ही अहम चुनाव से पहले अपनी पार्टी की कमान संभाल पा रहे हैं?

एयरस्पेस सेक्टर में दिग्गज होना तो दूर, भारत असल में एक आयातक ही है

दशकों से भारतीय रक्षा उद्योग ‘देसी’ कलपुर्ज़े ही देता रहा है. इनमें से ज़्यादातर में बस आयातित पुर्जों की एसेंबलिंग की जाती है और आयात पर गहरी निर्भरता के ऊपर परदा डाल दिया जाता है.

भारत हमेशा ऐसा नहीं था, हालात आज जितने खराब हैं, पहले कभी नहीं रहे

क्या भारत की व्यवस्था हमेशा इतनी लापरवाह थी कि नेता लोगों को ज़हर खाए, फंसे हुए या ज़िंदा जलते देखते रहें और कुछ भी न हो?

चुनावी सुधार या सत्ता मजबूत करने की रणनीति? मोदी सरकार के फैसलों पर सवाल

चुनाव प्रक्रिया को लेकर मोदी सरकार का तरीका ‘सुधार नहीं, बिगाड़’ कहना ज्यादा ठीक है. ये कोई बढ़ा-चढ़ाकर कही बात नहीं है. रिकॉर्ड खुद देख लीजिए.

भारत की माओवादियों से लंबी जंग में एक ऐसा खालीपन है जिसे मौतों का आंकड़ा भी नहीं भर सकता है

कमज़ोर शासन, भ्रष्टाचार और गरीबी भारत में आदिवासी जीवन की पहचान बने हुए हैं. इंडस्ट्रियल और माइनिंग प्रोजेक्ट्स शुरू होने से आदिवासियों के मुकाबले ठेकेदारों, नेताओं और अधिकारियों को ज़्यादा फायदा हुआ है.

बर्च बाय रोमियो लेन इस बात की मिसाल है कि दिल्ली का रौब गोवा में कैसे टिक जाता है

जैसे-जैसे हम बर्च के बारे में और जानते हैं, यह साफ़ होता जाता है कि वह अलग-अलग ज्यूरिस्डिक्शन के बीच के गैप में काम कर रहा था.

ट्रंप के लिए भारत सिर्फ इंडो-पैसिफिक सुरक्षा के लिए मायने रखता है

ट्रंप का सुरक्षा सिद्धांत कुछ ऐसी बात कहता है जिस पर विद्वान चर्चा करते थे, लेकिन रक्षा नीति के दस्तावेज़ों में ऐसा कम ही होता था.

भारत को हाइब्रिड एविएशन मॉडल की जरूरत है. यात्रियों को सुरक्षा और भरोसेमंद सेवाएं मिलनी चाहिए

भारत को वैज्ञानिक, डेटा-आधारित रेगुलेशन की ज़रूरत है, न कि मनमाने दखल की. ​​सुरक्षा सिर्फ़ सख़्ती से हासिल नहीं होती. इसके लिए रियलिस्टिक मॉडलिंग की ज़रूरत होती है.

गले मिलना, कार राइड, पर कोई डील नहीं—मोदी-पुतिन की मुलाकात ने दोनों देशों की कमजोरियों को उजागर किया

रूस की मजबूरियां उतनी नहीं हैं जितना नई दिल्ली मानने को तैयार है, और इसके नतीजे नई दिल्ली को ही भुगतने होंगे.

इंडिगो कैंसिलेशन विवाद: बाजार दबदबे और कमजोर नियमों ने कैसे खड़ा किया संकट

इंडिगो से सवाल पूछने के अलावा, यह भी पूछने का समय है कि पॉलिसी और रेगुलेशन ने एक बिज़नेस मॉडल को रेगुलेटर, पैसेंजर और सरकारी खजाने को बंधक बनाने की इजाज़त क्यों दी.

मत-विमत

अजित पवार की मौत ने भारतीय राजनीति में एक और ‘क्या होता अगर’ वाली बहस छोड़ दी है

दीन दयाल उपाध्याय की हत्या और माधवराव सिंधिया के प्लेन क्रैश से लेकर गांधी परिवार की हत्याओं तक, राजनीति में जो कुछ भी होता है, उसका हिसाब-किताब से कम और किस्मत से ज़्यादा लेना-देना होता है.

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लापता स्वरूपों का मामला: एसजीपीसी ने एसआईटी को रिकॉर्ड मुहैया कराया

चंडीगढ़, 29 जनवरी (भाषा) शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने पंजाब पुलिस के एक विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.