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Monday, 23 February, 2026
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मत-विमत

HAL पर टिकी भारत की रक्षा व्यवस्था. शुरुआत सबसे कमजोर कड़ी से होनी चाहिए—ह्यूमन रिसोर्स

HAL इंजीनियरों को विदेशों में और IITs तथा IIMs जैसे प्रमुख संस्थानों में प्रशिक्षण देने पर भारी निवेश करता है, लेकिन उनका पूरा और सही उपयोग नहीं हो पाता.

वेनेजुएला में अमेरिका का दखल सिर्फ ड्रग्स या तेल के लिए नहीं, बल्कि MAGA की चिंता से जुड़ा है

भारतीयों के लिए H1-B वीज़ा का MAGA द्वारा विरोध अब काफी जाना-पहचाना है, लेकिन हिस्पैनिक इमिग्रेशन के मुकाबले भारत का मुद्दा बहुत छोटा लगता है.

जेन-Z आंदोलन के बाद फिर पुरानी राजनीति, नेपाल की पार्टियां ‘स्टार्टिंग पॉइंट’ पर लौटीं

एक स्थिर नेपाल के लिए आगे का रास्ता लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने, समावेशी संवाद के जरिए राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने और कानून के शासन को बनाए रखने में है.

ईरान के विद्रोह ने क्यों बेनकाब की लिबरल राजनीति की उलझन

ईरान में हो रहे विद्रोह इतने बड़े हैं कि उन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता, लेकिन यह सवाल ज़रूर उठता है: इसमें इतना समय क्यों लगा?

BJP के मुख्यमंत्री चुनावी जीत से गलत सबक ले रहे हैं

बीजेपी के मुख्यमंत्रियों में क्या गलत हो गया है? कई मुख्यमंत्रियों की ढीली-ढाली सरकार इस सोच से निकलती है कि चुनावी जीत तीन ‘एम’ की वजह से मिली—मोदी, बहुसंख्यकवाद और पैसा.

ट्रंप 1991 के बाद अमेरिका की बनाई दुनिया को बिखेर रहे हैं. वह दूसरी महाशक्ति को स्वीकार नहीं करते

मल्टीपोलैरिटी की तमाम बातों के बावजूद, डॉनल्ड ट्रंप जानते हैं कि दुनिया अभी भी यूनिपोलर है और वे बिना किसी दिखावे के अपनी ताकत दिखा रहे हैं.

मुस्तफिज़ुर मामला: KKR का फैसला पाकिस्तान बहिष्कार से तुलना करने जैसा नहीं

मुस्तफिज़ुर रहमान बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे थे; वह कोलकाता का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. सिर्फ उनकी राष्ट्रीयता के आधार पर उन्हें अलग करना चुनिंदा और सुविधाजनक नैतिक तर्क को दिखाता है.

डेमोग्राफी के नाम पर J&K का मेडिकल कॉलेज बंद कराया गया. हिंदू भी हो सकते हैं अल्पसंख्यक

यह घटना एक असहज लेकिन संवैधानिक रूप से सामान्य बात को सामने लाती है: जम्मू-कश्मीर में हिंदू अल्पसंख्यक हैं. उनकी सुरक्षा क्षेत्रीय है, न कि "सभ्यतागत."

छोटे समझौते, बड़ा समय: ज्ञानरंजन की कहानियों में हमारे दौर का नैतिक नक्शा

जहां सुविधाजनक चुप्पियां आदत बन चुकी हैं, वहां ज्ञानरंजन की कहानियां आत्म-औचित्य, पलायन और रोज़मर्रा के नैतिक विचलनों को बेपर्दा करती हैं.

थैंक्यू मिस्टर ट्रंप: भारत को अब फ्री ट्रेड के डर से बाहर निकलकर सुधारों को तेज करने का मौका मिला है

ब्रिटेन, EFTA के साथ व्यापार समझौता झोली में आ चुका है, ईयू भी आने वाला है, चीन को छोड़ (उसके लिए भी प्रतिबंधों को हटाया जा रहा है) ‘RCEP’ का हर सदस्य साथ आ गया है. व्यापार को लेकर भारत का दिमाग भी बदल गया है.

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AI समिट पर घिरी मोदी सरकार को यूथ कांग्रेस के विरोध से मिला राहत का मौका

रणनीतिक तौर पर, बिना शर्ट वाला यह प्रदर्शन आत्मघाती गोल से भी बुरा था. अचानक, AI समिट की सारी गड़बड़ियां भूला दी गईं और यूथ कांग्रेस का विरोध ही मुद्दा बन गया.

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राजनीति

देश

शबरिमला ध्वज स्तंभ जांच में केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी का बयान दर्ज

तिरुवनंतपुरम, 23 फरवरी (भाषा) शबरिमला मंदिर में 2017 में एक नए ध्वज स्तंभ की स्थापना के संबंध में सोने और धन के कथित दुरुपयोग...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.