बांग्लादेश में तारिक रहमान किससे इतना डरते हैं कि वह न तो अपनी बीमार मां से मिलने घर आ पा रहे हैं और न ही अहम चुनाव से पहले अपनी पार्टी की कमान संभाल पा रहे हैं?
दशकों से भारतीय रक्षा उद्योग ‘देसी’ कलपुर्ज़े ही देता रहा है. इनमें से ज़्यादातर में बस आयातित पुर्जों की एसेंबलिंग की जाती है और आयात पर गहरी निर्भरता के ऊपर परदा डाल दिया जाता है.
कमज़ोर शासन, भ्रष्टाचार और गरीबी भारत में आदिवासी जीवन की पहचान बने हुए हैं. इंडस्ट्रियल और माइनिंग प्रोजेक्ट्स शुरू होने से आदिवासियों के मुकाबले ठेकेदारों, नेताओं और अधिकारियों को ज़्यादा फायदा हुआ है.
भारत को वैज्ञानिक, डेटा-आधारित रेगुलेशन की ज़रूरत है, न कि मनमाने दखल की. सुरक्षा सिर्फ़ सख़्ती से हासिल नहीं होती. इसके लिए रियलिस्टिक मॉडलिंग की ज़रूरत होती है.
इंडिगो से सवाल पूछने के अलावा, यह भी पूछने का समय है कि पॉलिसी और रेगुलेशन ने एक बिज़नेस मॉडल को रेगुलेटर, पैसेंजर और सरकारी खजाने को बंधक बनाने की इजाज़त क्यों दी.
दीन दयाल उपाध्याय की हत्या और माधवराव सिंधिया के प्लेन क्रैश से लेकर गांधी परिवार की हत्याओं तक, राजनीति में जो कुछ भी होता है, उसका हिसाब-किताब से कम और किस्मत से ज़्यादा लेना-देना होता है.