Thursday, 27 January, 2022
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‘वायरस वोट नहीं करता’- जब मोदी सरकार कोविड संकट से जूझ रही है तब BJP ने कड़ा सच सीखा

कुछ ऐसी चीजें हैं जो सशक्त नेता कभी नहीं करते हैं, जैसे यह स्वीकारना कि उनकी तरफ से कोई चूक हुई है. तीन हालिया उदाहरण बताते हैं कि सात साल में पहली बार नरेंद्र मोदी की नजरें नीची हुई हैं.

कोविड की ‘खतरनाक’ तस्वीर साफ है, कोई मोदी सरकार को आइना तो दिखाए

कोरोना पर समय से पहले जीत जाने के ऐलान के साथ कुंभ मेले और चुनावों को मंजूरी देकर और वैक्सीन की जरूरत की अनदेखी करके मोदी सरकार ने अपने लिए सबसे बड़े संकट को बुलावा दे दिया है, अब हकीकत को पहचानने की विनम्रता, और कोई ‘रामबाण’ ही इस संकट से उबार सकता है.

अयोध्या, काशी, मथुरा- ज्ञानवापी मस्जिद पर अदालत का फैसला ‘अतीत के प्रेतों’ को फिर से जगाएगा

ज्ञानवापी मस्जिद पर वाराणसी की जिला अदालत का आदेश इस उम्मीद को तोड़ता है कि अयोध्या में जो कुछ हुआ उसे अब दोहराया नहीं जाएगा, गड़े मुर्दों को उखाड़ते रहना विनाश को बुलावा देना ही है.

बुद्धिमानो! सवाल अर्थव्यवस्था का है ही नहीं, भारत ने मोदी की एक के बाद एक जीत से यह साबित कर दिया है

आर्थिक सुधारों को अब जिस तरह ताबड़तोड़ लागू किया जा रहा है उससे यही संकेत मिल रहा है कि वे आर्थिक ‘रिकवरी’ की कोशिश तो करेंगे मगर अब तक जो कारगर साबित होता रहा है उससे तौबा नहीं करेंगे.

मोदी-शाह के चुनावी प्रचार से पाकिस्तान, बांग्लादेश और आतंकवाद जैसे मुद्दे इस बार क्यों गायब हैं

इस बार के चुनावों में मोदी-शाह जोड़ी के प्रचार अभियान में पाकिस्तानियों, बांग्लादेशियों, आतंकवादियों पर हमले नहीं हो रहे हैं तो ऐसा लगता है कि उन्हें घरेलू राजनीति और राष्ट्रीय रणनीतिक हितों के द्वेषपूर्ण घालमेल के खतरों का एहसास हो गया है.

पाकिस्तान भारत के साथ शांति क्यों चाहता है, और मोदी भी इसे जंग से बेहतर विकल्प मानते हैं

अगर भारत को लगता है कि उसे दो सरहदों पर मोर्चा संभालना पड़ रहा है, तो पाकिस्तान के लिए चुनौतियां कहीं और गंभीर हैं, वह भारत से दुश्मनी जारी रख सकता है और चीन के उपनिवेश वाली हैसियत में बना रह सकता है.

मोदी का भारत विश्वगुरू बनना चाहता है, लेकिन तुनकमिजाजी इतनी कि जरा सी असहमति बर्दाश्त नहीं

दुनिया को भारत से बड़ी अपेक्षाएं हैं, जो पूरी नहीं होतीं तो वह शिकायत करने लगती है; मोदी सरकार को दुनिया से अपनी वाहवाही तो बहुत अच्छी लगती है मगर आलोचना से वह नाराज क्यों होती है और उसे खारिज करने पर क्यों आमादा हो जाती है.

मोदी सरकार को रोकना नामुमकिन, कांग्रेस की नैया डूब रही है और राहुल अपने डोले दिखा रहे

हम संस्थाओं को कमजोर किए जाने, एजेंसियों के दुरुपयोग, भेदभावपूर्ण क़ानूनों, देशद्रोह की धारा के इस्तेमाल, विधेयकों को जबरन पारित करवाने आदि की शिकायतें भले करें लेकिन ऐसे सभी प्रमुख मसलों पर निष्क्रियता का सारा दोष कांग्रेस के मत्थे जाता है.

हैबियस पोर्कस: ‘जेल नहीं बेल’ के सिद्धांत का कैसे हमारी न्यायपालिका गला घोंट रही है

हमारी स्वाधीनता की सुरक्षा करना न्यायपालिका की बड़ी ज़िम्मेदारी है और इसके लिए ‘हैबियस कॉर्पस’ की व्यवस्था का सहारा लिया जाता है लेकिन आज मजिस्ट्रेट इस तरह फैसले कर रहे हैं मानो नियम तो ‘जेल देने का ही है, बेल देना तो उनके ओहदे के दायरे से बाहर है’.

भारत के सामने दो सीमा पर युद्ध से बचने की चुनौती, क्या मोदी रणनीतिक हितों के लिए राजनीति को परे रखेंगे

भारत को रणनीति के मामले में चीन और पाकिस्तान के साथ मिलकर बनने वाले त्रिकोण को तोड़कर बाहर निकलना ही होगा लेकिन इससे पहले उसे यह तय करना होगा कि क्या वह घरेलू चुनावी फायदों के चक्कर में अपने रणनीतिक विकल्प सीमित करना चाहता है?

मत-विमत

यमन के कमजोर बागी विश्व अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बने और साबित किया कि फौजी ताकत की भी एक सीमा होती है

ईरान और सऊदी अरब अब बातचीत कर रहे हैं लेकिन जंग के जिन्न को वापस बोतल में बंद करने में शायद बहुत देर हो चुकी है. यमन में सत्ता के दलाल अपने दबदबे के लिए हिंसा पर ही निर्भर हैं.

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राजनीति

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इमेजिन मार्केटिंग ने सेबी के पास अपने आईपीओ के लिए दस्तावेज जमा कराए

नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड बोट के मालिकाना हक वाली इमेजिन मार्केटिंग ने अपने 2,000 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजानिक...

लास्ट लाफ

भारत के गरीब अब भी VIPs को सहन कर रहे हैं और डॉ अंबेडकर का मैकाले के भूत से जुड़ा एक सवाल है

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सबसे अच्छे कार्टून्स.