किसी भी युद्ध को जीतने तो क्या, शुरू करने की कुंजी यह होती है कि उसका लक्ष्य स्पष्ट हो. यह पूरी तरह से राजनीतिक विषय होता है. यह न तो भावनात्मक मामला होता है, और न ही शुद्ध रूप से सैन्य मामला.
चीन को छोड़ कोई भी देश ट्रंप के साथ बराबरी की हैसियत से बात नहीं कर सकता. इसलिए, जो ‘मिडल पावर’ देश इन बहुपक्षीय संगठनों के मूल आधार थे वे आज बेसहारा महसूस कर रहे हैं.
पाकिस्तान अधिकतर मामलों में भारत की बराबरी करे यह न केवल नामुमकिन है, बल्कि वह और पिछड़ता ही जाएगा. उसके नेता अपनी अवाम को अलग-अलग बोतल में सांप का तेल पेश करते रहेंगे.
ब्रिटेन, EFTA के साथ व्यापार समझौता झोली में आ चुका है, ईयू भी आने वाला है, चीन को छोड़ (उसके लिए भी प्रतिबंधों को हटाया जा रहा है) ‘RCEP’ का हर सदस्य साथ आ गया है. व्यापार को लेकर भारत का दिमाग भी बदल गया है.
इस साल मैंने नेशनल इंट्रेस्ट में जो लेख लिखे उनमें आपमें से कई को कुछ-न-कुछ गलत ज़रूर लगा होगा. मैं आपसे असहमत हो सकता हूं, लेकिन कुछ के लिए अपनी गलती कबूल करनी चाहिए. इस हफ्ते मैं उनमें से जो सबसे ताज़ा है उसकी बात करूंगा.
'पठान' अगर रूढ़िवादियों और उदारवादियों, दोनों को मुंह छिपाने की जगह मुहैया कराती है, तो ‘धुरंधर’ ऐसी कोई कृपा नहीं करती. आदित्य धर ने आडंबर के चंदोवे को फाड़ डाला है और चाकू को घुमा भी दिया है.
बदकिस्मती को दोष मत दीजिए. यह बड़ी नाकामी और लापरवाही है. हालात इतने खराब हैं कि पुराने पीएसयू दौर की इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया में भी इस पर बड़े अफसरों पर कार्रवाई हो जाती.
अब तक पाकिस्तान का कोई भी वजीर-ए-आज़म पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया, लेकिन मौजूदा प्रधानमंत्री ने सेना अध्यक्ष मुनीर को पांच साल और दे दिए, जो यही दर्शाता है कि इतिहास में जितने भी फौजी तानाशाह हुए उनमें पाकिस्तान वाले सबसे जूगाडू रहे हैं.
इस सीरीज को परिभाषित करने वाला तथ्य यह है कि भारत में लाल गेंद से खेले जाने वाले क्रिकेट का भारी पतन हो चुका है और मेहमान टीम हमसे ‘मशक्कत’ करवाने के दावे करके हमारा मखौल उड़ा सकती है.
तेजस एक बेहतरीन, कम कीमत वाला और ज़्यादातर देश में बना हुआ लड़ाकू विमान है, जिसका सुरक्षा रिकॉर्ड भी बहुत अच्छा रहा है. पिछले 24 साल में इसके सिर्फ दो हादसे हुए हैं, लेकिन ताज़ा हादसे के बाद इसका आत्म-विश्लेषण ज़रूरी हो जाता है.
जेडी (यू) के पास अभी भी लोकसभा में 12 और राज्य विधानसभा में 85 सदस्य हो सकते हैं, लेकिन नीतीश कुमार के बिना पार्टी के सामने नेतृत्व की बड़ी कमी खड़ी हो गई है.