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Monday, 19 January, 2026
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मेरी जां मुझे खबर है

राहुल और सिंधिया से महज 6 साल ही तो बड़े हैं अमित शाह पर कोई उन्हें युवा नेता क्यों नहीं कहता

भारतीय राजनीतिक में सियासी परिवारों की विरासत देखकर लगता है कि यहां इन परिवारों से संबंध रखने वाले नेता ही युवा कहला सकते हैं, फिर वो चाहे 40 साल के हों या फिर 50 के.

हथियार से ज्यादा खतरनाक हैं भड़काऊ भाषण, ये काल्पनिक दुश्मन खड़ा कर देते हैं

दिल्ली दंगों के दौरान तमाम ऐसी कहानियां आईं जिनमें हिंदुओं ने मुसलमानों को बचाया और मुसलमानों ने हिंदुओं को बचाया.

भारत बन गया विश्वगुरू, ट्रंप को लगा दी जॉर्ज पंचम की आंख

मरी हुई यमुना में शुद्ध जल बहने लगा है और गरीबी को एक दीवार में चुन दिया गया है. एक सप्ताह के अंदर इतिहास, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और समाज पर ऐसा नियंत्रण किसी देश ने किया होगा क्या?

दिल्ली चुनाव में ‘वोक फेमिनिज़्म’ का शिकार हुईं राजनीतिक पार्टियां

चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी ने महिला मुद्दों को लेकर संवेदनशील पार्टी की छवि पेश करने की कोशिशें की थीं. चाहे बात मेट्रो में महिलाओं की फ्री यात्रा के प्रस्ताव की हो या फिर बसों में महिलाओं का किराया माफ करने की.

शाहीन बाग: गृह मंत्री अमित शाह बताएं कि वो भारत माता के साथ हैं या खिलाफ

भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने तो यहां तक दावा किया के शाहीन बाग में औरतें पांच पांच सौ रुपये लेकर बैठ रही हैं. इस बात के बाद इन औरतों को लेकर एक से बढ़कर एक सेक्सिस्ट मीम बने.

गृहमंत्री अमित शाह की कल्पना वाले देश में ना युवा हैं और ना ही युवतियां, सिर्फ ट्रोल्स हैं!

वॉट्सऐप ग्रुप्स पर गृहमंत्री की ऐसी छवि उभरती है जैसे वो प्राचीनकाल के कोई राजा हों जो विश्व जीतने के लिए निकला है. उसके लिए युवाओं का एक ही उपयोग है- सेना में शामिल हो जाना.

अब समझ आ गया है कि मोदी सरकार के समर्थकों की लड़ाई औरतों से है

जेएनयू में फिल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के जाने के बाद सरकार के कथित समर्थक बौखला गए. उन्हें सोशल मीडिया पर गालियां देनी शुरू कर दी.

आर्मी अधिकारियों को नहीं, टीवी चैनलों को कोड ऑफ कंडक्ट की ज़्यादा ज़रूरत है

हाल ही में एक टीवी चैनल पर कार्यक्रम में इंडियन आर्मी से रिटायर्ड मेजर जनरल एसपी सिन्हा ने भड़काऊ बातें बोलते हुए सारी हदें पार कर दीं.

एक दशक में जेएनयू : एमएमएस, किस ऑफ लव और षड्यंत्रकारी रिपोर्ट ने बदल दी इमेज

जेएनयू मुक्त विचारधारा के लिए जाना जाता रहा है. जब लेफ्ट के नेता सीताराम येचुरी जेएनयू में पढ़ते थे तब उन्होंने इंदिरा गांधी का कैंपस में विरोध किया था.

राष्ट्रनिर्माण में व्यस्त हमारी महिला नेता रेप के मामलों पर क्यों नहीं बोलती हैं?

गौरतलब है कि पिछले दिनों अमित शाह ने एक कार्यक्रम में बिल्कुल प्राचीन इतिहास के नायकों की तरह कहा था कि औरतों की ‘इज्जत’ के लिए युद्ध भी करना पड़े तो करेंगे.

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छत्तीसगढ़ में मध्यान्ह भोजन के रसोइयों का विरोध प्रदर्शन जारी,कहा:66 रुपए रोज में कैसे गुजारा करें

रायपुर, 19 जनवरी (भाषा) छत्तीसगढ़ में अपनी मजदूरी 66 रुपये प्रतिदिन से बढ़ाकर 400 रुपये से अधिक करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

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