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Monday, 30 March, 2026
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इंडियन लिबरल्स मैटर

‘समाजवादी ढांचा’ और लोकतंत्र लंबे समय तक साथ नहीं चल सकते: मीनू मसानी

1989 में मीनू मसानी ने लिखा था कि ज़मीनी स्तर पर सतर्क लोकतंत्र के सबसे बड़े दुश्मन व्यक्तित्व पूजा, पार्टी के ‘हाई कमांड’ के प्रति अंधी वफादारी, चापलूसी और ऐसी नियंत्रित अर्थव्यवस्था हैं, जहां आर्थिक रूप से टिके रहने के लिए परमिट-लाइसेंस ज़रूरी शर्त बन जाता है.

बड़े पैमाने पर बेरोजगारी के लिए पूंजीवाद जिम्मेदार नहीं है, जापान और सिंगापुर को देखिए: बीएस अय्यर

1971 में बी.एस. अय्यर ने लिखा था कि लगातार बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी की बुराइयों के लिए कैपिटलिज़्म ज़िम्मेदार नहीं है, बल्कि राजनेताओं की नीतियां ज़िम्मेदार हैं जो इसके काम को पंगु बना देती हैं.

कल्याणकारी राज्य देश के लिए सामाजिक और आर्थिक आपदा: जीएन लवांडे

जी.एन. लवांडे ने 1958 में लिखा था कि एक वेलफेयर स्टेट में, कानून के शासन को खराब कर दिया गया है और जनता की राय और संप्रभुता को मंत्रियों के अलोकतांत्रिक आदेशों से बदला जा रहा है.

मार्क्सवाद सत्ता में आते ही लोकतांत्रिक अधिकारों को खत्म कर देता है: एमए वेंकट राव

लिबर्टेरियन कमेंटेटर एमए वेंकट राव ने 1963 में लिखा था कि क्लास वॉर पर आधारित होने के कारण, मार्क्सवाद पर आधारित कोई भी राज्य खुद को दूसरे सभी देशों के खिलाफ, कड़े और पूरी तरह से विरोध में खड़ा कर लेगा.

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रांची/हजारीबाग, 30 मार्च (भाषा) झारखंड उच्च न्यायालय ने हजारीबाग के बिष्णुगढ़ में 12 वर्षीय लड़की के साथ कथित बलात्कार और हत्या के मामले...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

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