1971 में बी.एस. अय्यर ने लिखा था कि लगातार बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी की बुराइयों के लिए कैपिटलिज़्म ज़िम्मेदार नहीं है, बल्कि राजनेताओं की नीतियां ज़िम्मेदार हैं जो इसके काम को पंगु बना देती हैं.
जी.एन. लवांडे ने 1958 में लिखा था कि एक वेलफेयर स्टेट में, कानून के शासन को खराब कर दिया गया है और जनता की राय और संप्रभुता को मंत्रियों के अलोकतांत्रिक आदेशों से बदला जा रहा है.
लिबर्टेरियन कमेंटेटर एमए वेंकट राव ने 1963 में लिखा था कि क्लास वॉर पर आधारित होने के कारण, मार्क्सवाद पर आधारित कोई भी राज्य खुद को दूसरे सभी देशों के खिलाफ, कड़े और पूरी तरह से विरोध में खड़ा कर लेगा.
भारत ने खामोशी से यह कबूल लिया है कि अमेरिका कुछ मामलों में उसका मददगार है, तो कुछ दूसरे मामलों में एक अड़ंगा भी. भारत के उत्कर्ष की रफ्तार को धीमा करने में चीन और अमेरिका, दोनों का एक अबोला स्वार्थ है.