दिल्ली की अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया कि दंगों के दौरान खालिद दिल्ली में था ही नहीं, और उसने इस पूर्व छात्र-नेता की जमानत याचिका को खारिज करने के लिए संरक्षित गवाहों के बयानों पर ही भरोसा किया.
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.