सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ खाद्य और घरेलू जरूरतों का सामान ऐसा था जिसमें पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में महामारी के पहले वर्ष 2020-21 में सकारात्मक वृद्धि दर देखी गई.
सरकार कड़वा सच क्यों नहीं बोल सकती, इसे समझना बहुत आसान है. तमाम युद्धों की तरह यह युद्ध भी जब रुक जाएगा तब भी भारत के हित विजेता के साथ भी जुड़े होंगे और हारने वालों के साथ भी.