ज्ञानोत्सव में मानव संसाधन विकास मंत्री निशंक के संबोधन में संकेत मिले कि नई शिक्षा नीति में संघ का प्रभाव होगा. वहीं हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की मुहिम तेज़ हो सकती है.
50 साल पहले बंबई से मेवात के नूह ज़िले में लाई गई 70 वर्षीय महबूबा एक बार भी अपने घर नहीं गई. मायके का रास्ता तक भूल चुकी महबूबा कहती हैं, 'हो सकता है कि अब मेरे मां बाप मर चुके हों.'
केवाईसी का काम तीसरे पक्ष से करवाना भी एक मसला है, क्योंकि वे बिना सोचे-समझे ग्राहकों से दस्तावेज़ मांगने के संदेशों की बमबारी करने के लिए जाने जाते हैं.
नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बृहस्पतिवार को छठे ‘बिम्सटेक’ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के वास्ते थाईलैंड के लिए रवाना हुए,...