विशेषज्ञों का कहना है कि वेतन सीमा, निचले स्तर के श्रमिकों का एक से दूसरी जगह बदलते रहना, छोटे प्रतिष्ठानों का जानबूझकर पंजीकरण से बचना, आदि वे कारण हैं जो ईपीएफ डेटा को त्रुटिपूर्ण संकेतक बनाते हैं.
यह समझने के लिए कि 1971 को भारत की संसदीय सीटों का आधार क्यों बनाया गया, 1960 के दशक के उस माल्थसवादी डर को फिर से देखना होगा, जो विकास से जुड़ी सोच पर हावी था.