आमतौर पर 'उच्च आवृत्ति संकेतक' में शामिल नहीं किए जाने वाले इंडस्ट्रियल एंड कंज्यूमर डेटा के विश्लेषण से पता चलता है कि भले ही मांग महामारी से उबरती नजर आ रही हो, लेकिन यह अभी भी कमजोर बनी हुई है.
यह समझने के लिए कि 1971 को भारत की संसदीय सीटों का आधार क्यों बनाया गया, 1960 के दशक के उस माल्थसवादी डर को फिर से देखना होगा, जो विकास से जुड़ी सोच पर हावी था.