41 दिनों बाद 24 घंटे में कोविड-19 के दो लाख से कम 1,96,427 नए मामले सामने आए हैं वहीं मौत का आंकड़ा भी कम हुआ है. 3,511 लोगों की मौत पिछले 24 घंटे में हुई है.
अलीगढ़ में, चाहे हिंदू हों या मुसलमान, युवा हों या बूढ़े, अधिकांश लोग कोविड का टीका नहीं लगवाना चाहते. उनका मानना है कि 99% लोग इसकी वजह से मर जाते हैं.
किसान बारी-बारी से टिकरी और कुंडली सीमाओं की यात्रा करते हैं, अधिकारियों का कहना है कि वे गांवों में कोविड ला रहे हैं. लेकिन प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कोविड 'काल्पनिक' है.
भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड ने सरकार को सूचित किया है कि उसने कोवैक्सीन से जुड़े 90 प्रतिशत दस्तावेज पहले ही डब्ल्यूएचओ में जमा करा दिए हैं ताकि टीके को आपात इस्तेAमाल के लिये सूचीबद्ध (ईयूएल) कराया जा सके.
केजरीवाल सरकार के स्वास्थ्य बुलेटिन में, 15 से 21 मई के बीच हर दिन जितनी मौतें बताई गईं, वो इसी अवधि के दौरान, दिल्ली नगर निगमों की ओर से दी गई संख्या से अधिक थी.
जिरोगा मधुबनी जिले के 21 विकास खंडों में से एक लौकाही का हिस्सा है. यहां टेस्टिंग कैंप उसके पड़ोसी गांव भरफोरी में 13 कोविड केस सामने आने के तीन दिन बाद लगाया गया था.
देश में उपचाराधीन मरीजों की संख्या में भी गिरावट आई है और अभी 27,20,716 लोगों का कोरोनावायरस संक्रमण का इलाज चल रहा है, जो कुल मामलों का 10.17 प्रतिशत है
जींद के गांवों में कोविड जैसे लक्षणों से हो रहीं मौतों में बढ़ोतरी के साथ, हवन के आयोजकों को लगता है कि इससे हवा में मौजूद वायरस को मारने में मदद मिलेगी और संक्रमित लोग ठीक हो जाएंगे.
मध्य प्रदेश के आदिवासी-बहुल ज़िले पन्ना में, ग्रामीणों का कहना है कि वो ‘अपने आप कोविड से ठीक हो गए हैं’. उन्हें अब वैक्सीन नहीं चाहिए, और कहते हैं कि सुईं की बजाय, वो वायरस से मरना पसंद करेंगे.
जोखिम खत्म नहीं हुआ है. इसका रूप बदल गया है—यह नॉन-परफॉर्मिंग लोन की वजह से बैलेंस शीट पर दबाव से हटकर तेजी से बढ़ते डिजिटल सिस्टम को संभालने की ऑपरेशनल चुनौतियों में बदल गया है.